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रायपुर में एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग (Angioplasty & Stenting)

एंजियोप्लास्टी में सिकुड़ी या बंद दिल की नस को अंदर से खोला जाता है — बैलून ब्लॉकेज को चौड़ा करता है और एक छोटी जालीदार ट्यूब (स्टेंट) नस को खुला रखती है। न ओपन सर्जरी, न सीने पर चीरा — और ज़्यादातर मरीज़ करीब एक हफ़्ते में सामान्य काम पर लौट आते हैं।

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आधुनिक कैथ लैब3D एंजियोग्राफी, IVUS और FFR
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प्रोसीजर के बारे में

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग (Angioplasty & Stenting) क्या है?

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग में दिल की बंद नस को अंदर से खोला जाता है। सिकुड़े हिस्से में बैलून पहुँचाकर कुछ सेकंड के लिए फुलाया जाता है, जिससे प्लाक बाहर की ओर दब जाता है, और फिर एक स्टेंट — मेडिकल ग्रेड धातु की छोटी जालीदार ट्यूब — वहीं छोड़ दी जाती है जो नस को स्थायी रूप से खुला रखती है।

यह सब कलाई की धमनी में बॉलपेन की नोक जितने छेद से होता है। सीने पर कोई चीरा नहीं, कोई हड्डी नहीं खोली जाती, और हार्ट-लंग मशीन भी नहीं लगती। आप होश में रहते हैं और डॉक्टर से बात कर सकते हैं। रिकॉर्ड में इसे PCI या PTCA लिखा जाता है, पर मरीज़ इसे आमतौर पर "स्टेंट डलवाना" ही कहते हैं।

आजकल ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट इस्तेमाल होते हैं। इन पर ऐसी दवा की परत होती है जो हफ़्तों तक धीरे-धीरे नस की दीवार में छूटती है, जिससे उसी जगह नस के दोबारा सिकुड़ने की संभावना बहुत कम हो जाती है। कुछ महीनों में स्टेंट पर शरीर की अपनी परत चढ़ जाती है और वह जीवनभर वहीं रहता है।

एंजियोप्लास्टी उसी ब्लॉकेज का इलाज करती है जिसे वह खोलती है। यह कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ को ठीक नहीं करती। बाकी नसों का प्लाक इसी बात से तय होता है कि आपका BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और तंबाकू कितने काबू में हैं — इसीलिए दवाएँ और फ़ॉलो-अप उतने ही ज़रूरी हैं जितना खुद प्रोसीजर।

एंजियोप्लास्टी बाईपास सर्जरी नहीं है। बाईपास सर्जरी में सीना खोलकर ब्लॉकेज के चारों ओर नया रास्ता बनाया जाता है, आमतौर पर पैर की नस या सीने की दीवार की धमनी से। एंजियोप्लास्टी में न कुछ खोला जाता है, न रास्ता बदला जाता है — मौजूदा नस को ही अंदर से चौड़ा किया जाता है। एंजियोप्लास्टी के बाद रिकवरी दिनों में होती है; बाईपास के बाद हफ़्तों में।

लगने वाला समयकरीब 30–60 मिनट
एनेस्थीसियालोकल — आप होश में रहते हैं
अस्पताल मेंआमतौर पर 1–2 दिन
सामान्य दिनचर्याकरीब एक हफ़्ते में
इंडिकेशन

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की ज़रूरत क्यों पड़ती है? — इंडिकेशन

एंजियोप्लास्टी दो में से किसी एक वजह से की जाती है: या तो उन लक्षणों से राहत देने के लिए जो दवाओं से काबू में नहीं आ रहे, या ऐसे ब्लॉकेज के इलाज के लिए जिसे छोड़ना ख़तरनाक है। खास तौर पर:

  • सीने का दर्द जो ज़िंदगी सीमित कर दे — जब चलने, सीढ़ी चढ़ने या काम करने पर एनजाइना होता हो और सही दवाओं के बावजूद बना रहे, तो नस खोलने से आमतौर पर जल्दी राहत मिलती है।
  • हार्ट अटैक के दौरान या तुरंत बाद — क्लॉट से बंद नस को तुरंत खोलना ज़रूरी है। यहाँ एंजियोप्लास्टी जीवन-रक्षक है, विकल्प नहीं, और जितनी जल्दी हो उतनी ज़्यादा मांसपेशी बचती है।
  • अनस्टेबल एनजाइना — आराम करते समय सीने का दर्द या अचानक बढ़ता दर्द बताता है कि प्लाक अस्थिर हो गया है। इसका इलाज तुरंत, अक्सर एक-दो दिन में किया जाता है।
  • ऐसा बड़ा ब्लॉकेज जो खून का बहाव रोक रहा हो — लगभग 70% से ज़्यादा सिकुड़न, या वह जिसे FFR नापकर बहाव रोकने वाला पाया जाए, खासकर उस नस में जो दिल के बड़े हिस्से को खून देती है।
  • अहम जगह का ब्लॉकेज — मुख्य बाईं नस की शुरुआत या LAD का शुरुआती हिस्सा बड़े इलाक़े को प्रभावित करता है — इनका इलाज छोटी शाखा के उतने ही ब्लॉकेज से ज़्यादा ज़रूरी माना जाता है।
  • खून कम पहुँचने से साँस फूलना या EF गिरना — जब जाँच बताए कि दिल की मांसपेशी ज़िंदा है पर उसे खून कम मिल रहा है, तो बहाव लौटाने से पंपिंग सुधर सकती है।
किसे ज़रूरत

किन मरीज़ों को एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की ज़रूरत हो सकती है?

हर ब्लॉकेज में स्टेंट ज़रूरी नहीं होता, और अच्छा कार्डियोलॉजिस्ट यह साफ़ कहेगा। एंजियोप्लास्टी आमतौर पर तब सलाह दी जाती है जब:

  • पूरी दवा के बावजूद लक्षण बने रहें — आप सही दवाएँ सही मात्रा में ले रहे हैं, फिर भी सामान्य दूरी बिना सीने की तकलीफ़ के नहीं चल पाते।
  • अभी हार्ट अटैक चल रहा हो — ऐसे में प्राइमरी एंजियोप्लास्टी पहली पसंद है और इमरजेंसी के तौर पर की जाती है।
  • जाँच में दिल का बड़ा हिस्सा ख़तरे में दिखे — TMT, स्ट्रेस इको या न्यूक्लियर स्कैन में मेहनत के समय बड़ा इलाक़ा खून की कमी दिखाए।
  • नस की बनावट स्टेंट के लिए उपयुक्त हो — एक या दो अलग-अलग ब्लॉकेज, ठीक मोटाई की नसों में, जिन्हें तस्वीरों के हिसाब से अंदर से सुरक्षित तरीके से खोला जा सके।
  • डायबिटीज़ के साथ एक या दो नसों की बीमारी — ऐसे मामलों में एंजियोप्लास्टी अक्सर सही रहती है, जबकि तीनों नसों की बीमारी में बाईपास बेहतर हो सकता है — यह हर मरीज़ में अलग तय होता है।

कब ज़रूरत नहीं होती: बिना लक्षण वाले हल्के ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी आमतौर पर सही जवाब नहीं है, क्योंकि ऐसे ब्लॉकेज में स्टेंट से जीवन नहीं बढ़ता — दवाएँ ज़्यादा काम करती हैं। यह तब भी पहली पसंद नहीं होती जब तीनों नसें बुरी तरह प्रभावित हों, मुख्य बाईं नस जटिल बीमारी के साथ शामिल हो, या डायबिटीज़ के साथ पूरी नसों में फैली बीमारी हो — ऐसे में बाईपास सर्जरी अक्सर लंबे समय के लिए बेहतर नतीजा देती है, और यह आपको साफ़ बताया जाना चाहिए, भले ही इसका मतलब ऑपरेशन के लिए भेजना हो।

प्रकार

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के प्रकार / विकल्प

ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट (DES)

आज का मानक स्टेंट। दवा की परत से स्टेंट के अंदर दोबारा सिकुड़न की संभावना पुराने बेयर-मेटल स्टेंट के मुक़ाबले बहुत घट जाती है। इसके लिए एक तय अवधि तक दो खून पतला करने वाली दवाएँ ज़रूरी होती हैं, आमतौर पर कम से कम एक साल, जब तक डॉक्टर अलग सलाह न दें।

ड्रग-कोटेड बैलून

ऐसा बैलून जो नस की दीवार पर दवा छोड़ता है पर कोई धातु नहीं छोड़ता। मुख्य रूप से पुराने स्टेंट के अंदर दोबारा सिकुड़न में, और बहुत पतली नसों या कुछ शाखा वाली जगहों पर इस्तेमाल होता है।

सिर्फ़ बैलून एंजियोप्लास्टी

बिना स्टेंट के सिर्फ़ बैलून। आज अकेले कम ही इस्तेमाल होता है, सिवाय बहुत पतली नसों के या जहाँ स्टेंट सुरक्षित तरीके से नहीं लग सकता।

एक नस बनाम कई नसों की एंजियोप्लास्टी

एक नस का इलाज हो सकता है या दो-तीन का। कई नसें होने पर अक्सर सबसे ज़रूरी नस पहले खोली जाती है और बाकी कुछ हफ़्तों बाद दूसरी बैठक में — कई मरीज़ों में यह एक ही बार में सब कुछ करने से ज़्यादा सुरक्षित होता है।

पहले से तय (इलेक्टिव) एंजियोप्लास्टी

एंजियोग्राफी के बाद तय तारीख़ पर, पूरी तैयारी के साथ। सुबह भर्ती और आमतौर पर अगले दिन छुट्टी।

इमरजेंसी (प्राइमरी) एंजियोप्लास्टी

हार्ट अटैक के दौरान तुरंत, चौबीसों घंटे, बिना किसी शेड्यूल के — इसके लिए अलग पेज है।

आपकी रिपोर्ट देखकर कार्डियोलॉजिस्ट बताएँगे कि आपके लिए कौन-सा प्रकार या तकनीक सही है।

फायदे

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के फायदे

  • सीने के दर्द और साँस फूलने से जल्दी राहत — कई मरीज़ों को एक-दो दिन में ही फ़र्क़ दिखता है — वही सीढ़ियाँ चढ़ने पर सीने में भारीपन नहीं होता।
  • न सीने पर चीरा, न टाँके — सिर्फ़ कलाई पर एक छोटा छेद होता है। कुछ खोला नहीं जाता, इसलिए न लंबा घाव भरना पड़ता है, न सीने के घाव में संक्रमण का ख़तरा रहता है।
  • अस्पताल में कम रुकना — आमतौर पर एक-दो दिन, जबकि बाईपास में करीब एक हफ़्ता; और सामान्य दिनचर्या में करीब एक हफ़्ते में वापसी, छह-आठ हफ़्ते के बजाय।
  • हार्ट अटैक में जीवन-रक्षक — चल रहे हार्ट अटैक में जल्दी की गई एंजियोप्लास्टी दिल की मांसपेशी का नुकसान कम करती है और जीवन की संभावना बढ़ाती है।
  • ज़रूरत पड़ने पर दोबारा हो सकती है — सालों बाद नया ब्लॉकेज बने तो आमतौर पर दोबारा एंजियोप्लास्टी हो सकती है — भविष्य के इलाज का रास्ता बंद नहीं होता।
  • सिर्फ़ लोकल एनेस्थीसिया — न जनरल एनेस्थीसिया, न वेंटिलेटर, और बेहोश करने से जुड़े ख़तरे व सुस्ती भी नहीं।
प्रक्रिया

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की प्रक्रिया: क्या-क्या होता है

एंजियोप्लास्टी कैथ लैब में होती है, तैयारी एंजियोग्राफी जैसी ही। कई मरीज़ों में यह एंजियोग्राफी के तुरंत बाद उसी बैठक में की जाती है। आप पूरे समय होश में रहते हैं। कदम-दर-कदम यह ऐसे होती है:

1

तैयारी और खून पतला करने वाली दवाएँ

IV लाइन लगती है, ECG स्टिकर लगते हैं और खून पतला करने वाली दवाओं की लोडिंग डोज़ दी जाती है — ये बेहद ज़रूरी हैं, क्योंकि स्टेंट बाहरी सतह है और उस पर क्लॉट नहीं बनने देना है।

2

लोकल एनेस्थीसिया और शीथ

कलाई (या जांघ) को इंजेक्शन से सुन्न करके धमनी में छोटी प्लास्टिक शीथ लगाई जाती है। कुछ सेकंड चुभन होती है; उसके बाद सिर्फ़ दबाव महसूस होता है।

3

गाइड कैथेटर लगाया जाता है

कैथेटर बंद नस के मुँह तक पहुँचाया जाता है। ब्लॉकेज साफ़ देखने और सही तरीका तय करने के लिए दोबारा डाई डाली जाती है।

4

ब्लॉकेज के पार पतला वायर डाला जाता है

बेहद पतला गाइडवायर, कहीं-कहीं बाल से भी महीन, सिकुड़न के पार पहुँचाया जाता है। यही सबसे अहम कदम है — बाकी सब इसी वायर के ऊपर से जाता है।

5

ब्लॉकेज तैयार किया जाता है

पहले छोटा बैलून फुलाकर सिकुड़न खोली जाती है। प्लाक सख़्त या कैल्शियम वाला हो तो खास बैलून या रोटाब्लेशन बर इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि बाद में स्टेंट ठीक से फैल सके।

6

स्टेंट लगाया जाता है

बैलून पर चढ़ा स्टेंट ठीक ब्लॉकेज वाली जगह पर रखकर बैलून फुलाया जाता है और स्टेंट नस की दीवार से चिपककर खुल जाता है। फुलाने के 10–20 सेकंड तक सीने में भारीपन लग सकता है, क्योंकि उतनी देर बहाव रुकता है — डॉक्टर को बताएँ; बैलून हटते ही यह चला जाता है।

7

नतीजा जाँचा जाता है

दोबारा डाई डाली जाती है, और कई मामलों में IVUS या FFR से पुष्टि की जाती है कि स्टेंट पूरी तरह फैला है और सही जगह है। आधा-अधूरा फैला स्टेंट बाद की दिक़्क़तों की आम वजह है, इसलिए यह जाँच मायने रखती है।

8

शीथ निकालकर दबाव

कैथेटर निकाल लिए जाते हैं, कलाई पर दबाव बैंड लगता है और आपको निगरानी के लिए वार्ड या डे-केयर में ले जाया जाता है। बैंड कुछ घंटों में धीरे-धीरे ढीला किया जाता है।

बैलून फुलाते समय सीने में दर्द क्यों होता है? क्योंकि उन कुछ सेकंडों में बैलून नस को पूरी तरह बंद कर देता है और दिल के उस हिस्से को खून नहीं मिलता — वही प्रक्रिया जो एनजाइना में होती है। यह अपेक्षित है, टीम इसके लिए तैयार रहती है, और बैलून हटते ही ख़त्म हो जाता है। चुपचाप सहने के बजाय हमेशा बता दें।

प्रोसीजर से पहले

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग से पहले की तैयारी

अगर एंजियोप्लास्टी इमरजेंसी नहीं बल्कि पहले से तय है, तो तैयारी एंजियोग्राफी जैसी ही होती है, पर खून पतला करने वाली दवाओं और किडनी पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। हर रिपोर्ट साथ लाएँ, एंजियोग्राफी की CD समेत।

ये ज़रूर करें

  • प्रोसीजर से करीब 4–6 घंटे पहले से खाली पेट — ठोस खाना नहीं; थोड़ा-थोड़ा पानी आमतौर पर ले सकते हैं।
  • BP और दिल की दवाएँ पानी के घूँट के साथ लें, जब तक मना न किया गया हो।
  • प्रोसीजर से पहले खून पतला करने वाली दवाएँ ठीक वैसे ही शुरू या जारी रखें जैसे लिखी गई हैं — ये वैकल्पिक नहीं हैं।
  • किसी भी एलर्जी के बारे में बताएँ, खासकर डाई, एस्पिरिन या क्लोपिडोग्रेल से।
  • एंजियोग्राफी की CD और रिपोर्ट, पुरानी ECG व इको रिपोर्ट और दवाओं की पूरी सूची साथ लाएँ।
  • एक अटेंडेंट साथ रखें, और स्टेंट का खर्च व बीमा की कागज़ी कार्रवाई पहले ही तय कर लें।
  • अगर आगे कोई सर्जरी या दाँत का इलाज होना है तो डॉक्टर को बताएँ — खून पतला करने वाली दवाओं का समय उसी हिसाब से तय करना पड़ता है।

इनसे बचें

  • एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल, टिकाग्रेलर या प्रैसुग्रेल कभी भी अपने आप बंद न करें — स्टेंट के बाद जल्दी बंद करना सबसे ख़तरनाक गलती है।
  • डायबिटीज़ की गोली या इंसुलिन बिना पूछे न लें, क्योंकि आप खाली पेट रहेंगे।
  • मेटफ़ॉर्मिन आमतौर पर डाई के आसपास रोकी जाती है — कब बंद और कब शुरू करनी है, पूछ लें।
  • एक रात पहले भारी खाना न खाएँ, और उस दिन धूम्रपान न करें।
  • कलाई या जांघ पर तेल या क्रीम न लगाएँ।

स्टेंट के बारे में प्रोसीजर से पहले पूछें, बाद में नहीं। आपको यह जानने का पूरा हक़ है कि कौन-सा स्टेंट लगेगा, कितने लग सकते हैं, हर एक का खर्च कितना है, और बीमा या सरकारी योजना में क्या कवर है। भारत में स्टेंट की कीमतें सरकार द्वारा तय सीमा में हैं, और सहमति से पहले यह आँकड़ा आपको लिखकर बताया जाना चाहिए। अच्छा अस्पताल यह बिना पूछे ही करता है।

जाँचें

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग से पहले ज़रूरी जाँचें

  • कोरोनरी एंजियोग्राफी — सबसे ज़रूरी जाँच — तस्वीरें ही तय करती हैं कि स्टेंट संभव है या नहीं, कौन-सी नस, कितने साइज़ और लंबाई का, और कहीं बाईपास तो बेहतर नहीं।
  • खून की जाँच — हीमोग्लोबिन, क्रिएटिनिन, शुगर, क्लॉटिंग प्रोफ़ाइल — खून बहने का ख़तरा और किडनी की हालत दोनों तय करते हैं कि प्रोसीजर कैसे होगा और कितनी डाई इस्तेमाल हो सकती है।
  • ECG — धड़कन का आधार रिकॉर्ड, जिससे बाद में तुलना की जाती है।
  • 2D इको — पंपिंग की ताक़त और यह बताता है कि दिल का कोई हिस्सा पहले से ख़राब तो नहीं, जिससे फ़ैसला प्रभावित होता है।
  • कुछ मरीज़ों में वायबिलिटी जाँच — पंपिंग कमज़ोर हो तो स्ट्रेस इको या स्कैन से देखा जाता है कि वह मांसपेशी अब भी ज़िंदा है और खून लौटाने लायक़ है या नहीं।
  • संक्रमण की जाँच — HIV, हेपेटाइटिस B और C — किसी भी कैथेटर प्रोसीजर से पहले सामान्य जाँच।

अगर एंजियोग्राफी कहीं और हो चुकी है तो सिर्फ़ रिपोर्ट नहीं, CD भी लाएँ। स्टेंट की योजना बनाने के लिए कार्डियोलॉजिस्ट को तस्वीरें ही चाहिए होती हैं।

एनेस्थीसिया

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग में एनेस्थीसिया / सेडेशन

सिर्फ़ लोकल एनेस्थीसिया। कलाई या जांघ की धमनी के ऊपर की त्वचा छोटे इंजेक्शन से सुन्न की जाती है; बाकी प्रोसीजर में दबाव महसूस होता है, दर्द नहीं।

आप पूरे समय होश में और टीम के संपर्क में रहते हैं। यह जानबूझकर किया जाता है — बैलून फुलाते समय सीने में तकलीफ़ हो तो आप तुरंत बता सकते हैं, जो टीम के लिए उपयोगी जानकारी है।

घबराहट हो तो IV लाइन से हल्की सेडेशन दी जा सकती है, जिससे आप शांत महसूस करते हैं पर सोते नहीं। जटिल या लंबे प्रोसीजर में आराम के लिए थोड़ी गहरी सेडेशन दी जा सकती है।

सामान्य एंजियोप्लास्टी में जनरल एनेस्थीसिया इस्तेमाल नहीं होता। यह सिर्फ़ बहुत अस्थिर मरीज़ों में होता है, जिन्हें स्टेंट से अलग कारणों से साँस की सहायता चाहिए होती है।

समय

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग में कितना समय लगता है?

एक नस की सीधी-सादी एंजियोप्लास्टी में शुरू होने के बाद आमतौर पर करीब 30–60 मिनट लगते हैं। दो नसें, लंबा या कैल्शियम वाला ब्लॉकेज, और IVUS व FFR का इस्तेमाल — इन सबसे समय बढ़ता है।

जटिल मामले — पूरी तरह बंद पुरानी नस (CTO), रोटाब्लेशन वाली सख़्त कैल्शियम, या दो स्टेंट वाली शाखा — दो घंटे या उससे ज़्यादा ले सकते हैं। ज़्यादा समय लगने का मतलब यह नहीं कि कुछ गड़बड़ हुई; आमतौर पर इसका मतलब है कि डॉक्टर उतनी सावधानी बरत रहे हैं जितनी नस की बनावट माँगती है।

एक नस की सीधी एंजियोप्लास्टीकरीब 30–60 मिनट
IVUS या FFR के साथकरीब 15–20 मिनट और
एक ही बैठक में दो-तीन नसेंकरीब 1.5–2 घंटे
जटिल, कैल्शियम वाले या CTO मामले2 घंटे या ज़्यादा
अस्पताल में रुकना

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के लिए अस्पताल में भर्ती / रुकना

कलाई से होने वाली तय एंजियोप्लास्टी में आमतौर पर एक से दो दिन रुकना होता है। प्रोसीजर के बाद कई घंटे निगरानी होती है, दबाव बैंड धीरे-धीरे ढीला किया जाता है, और छुट्टी से पहले ECG और कभी-कभी खून की जाँच दोहराई जाती है।

सामान्य इलेक्टिव एंजियोप्लास्टी के लिए ICU बेड की ज़रूरत आमतौर पर नहीं पड़ती, हालाँकि रात भर मॉनिटर वाले बेड पर रखा जा सकता है। हार्ट अटैक के दौरान हुई एंजियोप्लास्टी के बाद रुकना लंबा होता है — आमतौर पर तीन से पाँच दिन, शुरुआत CCU से।

जाने से पहले यह सब लिखित में ज़रूर लें: हर स्टेंट का नाम और कहाँ लगा, आपका स्टेंट कार्ड, कौन-सी खून पतला करने वाली दवा कितने समय तक, और फ़ॉलो-अप की तारीख़। स्टेंट कार्ड लिए बिना अस्पताल से न निकलें।

सुरक्षा

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के जोखिम और संभावित जटिलताएँ

आज एंजियोप्लास्टी एक सामान्य, स्थापित प्रोसीजर है और ज़्यादातर मरीज़ों में बिना किसी जटिलता के पूरी होती है। जोखिम कम हैं पर असली हैं, और इमरजेंसी में, बुज़ुर्गों में, किडनी की बीमारी वाले डायबिटीज़ मरीज़ों में और जटिल ब्लॉकेज में ज़्यादा होते हैं। आपका अपना जोखिम आपको आम बातों में नहीं, आपके हिसाब से बताया जाना चाहिए।

आम और मामूली

  • कलाई या जांघ पर कुछ दिन नील, दर्द या छोटी गाँठ।
  • हर बार बैलून फुलाने पर 10–20 सेकंड सीने में भारीपन, जो तुरंत चला जाता है।
  • डाई डालते समय शरीर में गर्माहट की लहर।
  • एक-दो दिन हाथ या पैर में हल्का दर्द।

कम या दुर्लभ

  • छेद वाली जगह से खून बहना या बड़ा हीमेटोमा, जिसमें दबाव, निगरानी और कभी-कभी खून चढ़ाने की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • स्टेंट थ्रॉम्बोसिस — स्टेंट के अंदर क्लॉट बनना। दुर्लभ पर गंभीर, और यही मुख्य वजह है कि खून पतला करने वाली दवाएँ अपने आप कभी बंद नहीं करनी चाहिए।
  • महीनों बाद स्टेंट के अंदर दोबारा सिकुड़न (रेस्टेनोसिस), जो आमतौर पर सीने के दर्द के लौटने से पता चलती है और दोबारा इलाज से ठीक हो जाती है।
  • डाई के बाद किडनी की कार्यक्षमता में अस्थायी गिरावट, मुख्य रूप से डायबिटीज़ और पहले से किडनी रोग वालों में।
  • नस को चोट या प्रोसीजर के दौरान किसी शाखा का बंद हो जाना, जिसे टीम वहीं संभाल लेती है।
  • हार्ट अटैक, स्ट्रोक, इमरजेंसी बाईपास सर्जरी या मृत्यु — तय प्रोसीजर में कम, इमरजेंसी और बहुत बीमार मरीज़ों में ज़्यादा।

सबसे बड़ा जोखिम वह है जो आपके हाथ में है। स्टेंट के बाद सबसे आम गंभीर समस्या स्टेंट के अंदर क्लॉट बनना है, जो अक्सर इसलिए होता है कि खून पतला करने वाली दवाएँ जल्दी बंद कर दी गईं — कभी दाँत या छोटे ऑपरेशन से पहले किसी ग़ैर-कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर, तो कभी इसलिए कि मरीज़ को ठीक लग रहा था। इन्हें कभी भी बिना पूछे बंद न करें। कोई भी डॉक्टर बंद करने को कहे तो पहले हमें कॉल करें।

रिकवरी

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के बाद रिकवरी

पहले कुछ घंटे

ECG मॉनिटरिंग के साथ वार्ड में आराम। कलाई का बैंड धीरे-धीरे ढीला होता है। डॉक्टर की इजाज़त के बाद खा सकते हैं, और डाई निकालने के लिए ज़्यादा पानी पीने को कहा जाता है।

घर जाना

ज़्यादातर मरीज़ अगले दिन घर जाते हैं। स्टेंट कार्ड, डिस्चार्ज समरी और दवाओं की साफ़ सूची मिलेगी — निकलने से पहले डॉक्टर के साथ पढ़ लें और पूछ लें कि हर गोली किस काम की है।

पहला हफ़्ता

छेद वाली जगह 2–3 दिन सूखी रखें, उस हाथ से भारी वज़न न उठाएँ, और समतल जगह पर थोड़ा-थोड़ा चलें। ऑफ़िस का काम करने वाले ज़्यादातर लोग करीब एक हफ़्ते में लौट जाते हैं; मेहनत वाले काम में दो से चार हफ़्ते लगते हैं।

2–4 हफ़्ते

चलना धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। कार्डियक रिहैबिलिटेशन मिले तो ज़रूर जुड़ें — स्टेंट के बाद निगरानी में की गई कसरत से क्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं।

ड्राइविंग और सफ़र

बिना जटिलता वाली इलेक्टिव एंजियोप्लास्टी के बाद ड्राइविंग आमतौर पर करीब एक हफ़्ते में शुरू की जा सकती है। लंबे सफ़र या हवाई यात्रा के लिए, खासकर हार्ट अटैक हुआ हो तो, अपने डॉक्टर से अपनी स्थिति के हिसाब से पूछें।

लंबे समय में

स्टेंट नस की दीवार का हिस्सा बन जाता है। आपके अगले दस साल स्टेंट से नहीं, बल्कि BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, तंबाकू, वज़न और नियमित दवाओं से तय होते हैं।

बाद की देखभाल

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के बाद देखभाल और सावधानियाँ

  • खून पतला करने वाली दवाएँ हर दिन, एक ही समय पर, ठीक उतने समय तक लें जितना कार्डियोलॉजिस्ट कहें — दूसरी दवा आमतौर पर कम से कम एक साल, और एस्पिरिन अक्सर जीवनभर।
  • स्टेंट कार्ड हमेशा पर्स में रखें और इलाज करने वाले हर डॉक्टर या डेंटिस्ट को दिखाएँ।
  • दाँत निकलवाने, एंडोस्कोपी या छोटे ऑपरेशन से पहले खून पतला करने वाली दवा बिना कार्डियोलॉजिस्ट से पूछे कभी बंद न करें।
  • छेद वाली जगह 2–3 दिन साफ़-सूखी रखें और उस हाथ से भारी वज़न न उठाएँ।
  • कोलेस्ट्रॉल की दवा (स्टैटिन) रिपोर्ट सामान्य होने पर भी नियमित लें — यह सिर्फ़ नंबर घटाने की गोली नहीं, प्लाक को स्थिर रखने वाली दवा है।
  • तंबाकू पूरी तरह छोड़ें। स्टेंट के बाद धूम्रपान जारी रखने से स्टेंट बंद होने और नए ब्लॉकेज बनने का ख़तरा बहुत बढ़ जाता है।
  • BP डॉक्टर के बताए लक्ष्य से नीचे रखें, और डायबिटीज़ हो तो HbA1c बताए दायरे में रखें।
  • डॉक्टर की इजाज़त के बाद ज़्यादातर दिन 30–40 मिनट चलें और वज़न काबू में रखें।
  • हर फ़ॉलो-अप विज़िट पर आएँ, और सीने का दर्द दोबारा हो तो अगली तारीख़ का इंतज़ार किए बिना तुरंत बताएँ।
नतीजे

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की सफलता / अपेक्षित नतीजे

तकनीकी रूप से, तय की गई एंजियोप्लास्टी में ज़्यादातर मामलों में नस सफलतापूर्वक खुल जाती है। लक्षणों से राहत आमतौर पर जल्दी मिलती है — चलने पर सीने का दर्द झेल रहे ज़्यादातर मरीज़ पाते हैं कि कुछ ही दिनों में यह ख़त्म या बहुत कम हो गया है।

आधुनिक ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट के साथ स्टेंट के अंदर दोबारा सिकुड़न कम होती है, और ज़्यादातर मरीज़ उस जगह पर सालों तक ठीक रहते हैं। बाद में दिक़्क़त की सबसे आम वजह स्टेंट का फ़ेल होना नहीं, बल्कि नसों में कहीं और नई बीमारी बनना या खून पतला करने वाली दवाएँ जल्दी बंद कर देना होती है।

स्टेंट की ईमानदार सीमा यह है: हार्ट अटैक में यह मांसपेशी और जान बचाता है, और एनजाइना में लक्षणों से बहुत असरदार राहत देता है। स्थिर, हल्की बीमारी में यह अपने आप उम्र नहीं बढ़ाता — वह काम दवाएँ और जोखिम नियंत्रण करते हैं। जो डॉक्टर कहे कि स्टेंट ने आपकी हृदय बीमारी "ठीक" कर दी, वह बात बढ़ा-चढ़ाकर कह रहे हैं।

आपका लंबा नतीजा किससे तय होता है खून पतला करने वाली दवाएँ और स्टैटिन नियमित लेना, तंबाकू पूरी तरह छोड़ना, BP और शुगर काबू में रखना, नियमित चलना, और फ़ॉलो-अप पर आना। जो मरीज़ ये करते हैं, वे स्टेंट के बाद बहुत अच्छा रहते हैं। जो "अब ठीक लग रहा है" कहकर दवा बंद कर देते हैं, वही लौटकर आते हैं।

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के बाद डॉक्टर से तुरंत कब संपर्क करें?

घर जाने के बाद इनमें से कुछ भी हो तो तुरंत हमसे संपर्क करें — या नज़दीकी इमरजेंसी जाएँ। स्टेंट के बाद सीने का दर्द कभी नज़रअंदाज़ न करें और न घर पर इलाज करें।

  • सीने में दर्द, भारीपन या दबाव का लौटना, खासकर आराम करते समय या पसीने के साथ — इसे इमरजेंसी मानें
  • नई या बढ़ती साँस की तकलीफ़, या पैरों में सूजन
  • छेद वाली जगह से फिर खून आना: दूसरे हाथ से ज़ोर से दबाएँ, दबाए रखें और हमें कॉल करें
  • तेज़ी से बढ़ती सूजन, बहुत दर्द, या उस तरफ़ का हाथ-पैर ठंडा, पीला या सुन्न होना
  • खून पतला करने वाली दवा ख़त्म हो गई हो, या कोई डॉक्टर उसे बंद करने को कहे — बंद करने से पहले कॉल करें
  • काला पाख़ाना, उल्टी या पेशाब में खून, या बिना वजह नील पड़ना — दवा से खून बहने का संकेत
  • बेहोशी, तेज़ चक्कर, या बहुत तेज़ या अनियमित धड़कन
  • बुखार, या छेद वाली जगह पर लालिमा, गर्माहट या मवाद
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग — मरीज़ों के आम सवाल

कुल खर्च इस पर निर्भर करता है कि कितने स्टेंट लगेंगे, कौन-सा स्टेंट है, IVUS या FFR इस्तेमाल हुआ या नहीं, कमरा कौन-सा है और कितने दिन रुकना है। भारत में स्टेंट की कीमतें सरकार द्वारा तय सीमा में हैं, और हम यह आँकड़ा सहमति से पहले लिखकर देते हैं, बाद में नहीं। सरकारी स्वास्थ्य योजनाएँ और ज़्यादातर बीमा पॉलिसियाँ एंजियोप्लास्टी को कवर करती हैं, पॉलिसी की सीमा तक स्टेंट समेत; हमारी टीम पात्रता जाँचकर प्री-ऑथराइज़ेशन आपके साथ पूरा करती है। अगर प्रोसीजर के दौरान एक से ज़्यादा स्टेंट ज़रूरी लगे, तो इस्तेमाल से पहले परिवार को बताया जाता है।

स्टेंट स्थायी होता है और कभी निकाला या बदला नहीं जाता। कुछ महीनों में उस पर नस की अपनी भीतरी परत चढ़ जाती है और वह दीवार का हिस्सा बन जाता है। जो हो सकता है वह है स्टेंट के अंदर दोबारा सिकुड़न, जो ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट के साथ कम होती है, या नसों में कहीं और नया ब्लॉकेज बनना। इनमें से किसी का मतलब स्टेंट "बदलना" नहीं होता — इनका अपना इलाज होता है, अक्सर दोबारा एंजियोप्लास्टी से।

जहाँ स्टेंट लगा है वहाँ दोबारा सिकुड़न आज के स्टेंट के साथ कम होती है, और अगर आप दवाएँ लेते रहें और BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल व तंबाकू काबू में रखें तो और भी कम। पर स्टेंट सिर्फ़ एक जगह का इलाज करता है — बाकी नसों की बीमारी नहीं रोकता। कहीं और नया ब्लॉकेज बन सकता है, इसीलिए जीवनभर दवाएँ और फ़ॉलो-अप ज़रूरी हैं। चलने पर सीने का दर्द लौटे तो उसे गैस मानकर टालने के बजाय डॉक्टर को बताएँ।

ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट के बाद आमतौर पर दोनों दवाएँ साथ में कम से कम एक साल, फिर अकेले एस्पिरिन, अक्सर जीवनभर — पर सही अवधि आपके खून बहने के ख़तरे और स्टेंट की जटिलता देखकर कार्डियोलॉजिस्ट तय करते हैं। कोई भी गोली अपने आप बंद न करें। जल्दी बंद करने से, खासकर पहले कुछ महीनों में, स्टेंट के अंदर क्लॉट बन सकता है, जो मेडिकल इमरजेंसी है और अक्सर बड़े हार्ट अटैक के रूप में सामने आता है। ठीक लगना दवा बंद करने की वजह नहीं है; आप ठीक इसी दवा की वजह से हैं।

हर बार पहले अपने कार्डियोलॉजिस्ट को कॉल करें। दाँत के कई इलाज, साधारण दाँत निकलवाना भी, बिना दवा बंद किए सुरक्षित तरीके से हो सकते हैं, स्थानीय उपायों से खून रोककर। कुछ सर्जरी में दो में से एक दवा थोड़े समय के लिए रोकी जा सकती है, पर यह फ़ैसला इस पर निर्भर है कि स्टेंट कितने समय पहले लगा और किस तरह का है। डेंटिस्ट या सर्जन को अकेले फ़ैसला करने के बजाय कार्डियोलॉजिस्ट से बात करनी चाहिए।

कलाई से हुई बिना जटिलता वाली इलेक्टिव एंजियोप्लास्टी के बाद ऑफ़िस का काम करने वाले ज़्यादातर लोग करीब एक हफ़्ते में लौट जाते हैं, और ड्राइविंग भी आमतौर पर लगभग उसी समय। मेहनत वाले काम में आमतौर पर दो से चार हफ़्ते लगते हैं। स्थिर मरीज़ में हवाई सफ़र आमतौर पर एक-दो हफ़्ते बाद ठीक रहता है। अगर एंजियोप्लास्टी हार्ट अटैक के दौरान हुई थी तो ये सभी अवधियाँ लंबी होती हैं और डॉक्टर अलग से सलाह देंगे।

कोई भी हमेशा बेहतर नहीं — यह आपकी नसों की बनावट पर निर्भर है। एक या दो अलग-अलग ब्लॉकेज में, हार्ट अटैक में, और जब जल्दी रिकवरी ज़रूरी हो, एंजियोप्लास्टी आमतौर पर बेहतर रहती है। तीनों नसों की गंभीर बीमारी में, मुख्य बाईं नस की जटिल बीमारी में, और डायबिटीज़ के साथ पूरी नसों में फैली बीमारी वाले कई मरीज़ों में बाईपास लंबे समय के लिए बेहतर नतीजा देती है। यह फ़ैसला आपकी एंजियोग्राफी की तस्वीरों से होना चाहिए, वजह सहित समझाया जाना चाहिए, और जटिल मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट और सर्जन के बीच चर्चा होनी चाहिए। बिना साफ़ वजह किसी एक विकल्प की ओर धकेला जाए तो दूसरी राय ज़रूर लें।

आप होश में रहते हैं, और सिर्फ़ कलाई पर लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन चुभता है। उसके बाद दर्द नहीं, दबाव महसूस होता है। एक चीज़ ज़रूर होगी — हर बार बैलून फुलाने पर 10–20 सेकंड सीने में भारीपन, क्योंकि उतनी देर बहाव रुकता है; बैलून हटते ही यह चला जाता है। महसूस हो तो टीम को बताएँ। बहुत घबराहट हो तो पहले ही हल्की सेडेशन माँग लें।

कोई तय संख्या नहीं — यह ब्लॉकेज, इस्तेमाल हुई डाई और आप प्रोसीजर कैसे सह रहे हैं, इस पर निर्भर है। अक्सर सबसे ज़रूरी नस पहले खोली जाती है और बाकी कुछ हफ़्तों बाद दूसरी बैठक में, जो एक ही बार में सब करने से ज़्यादा सुरक्षित होता है, खासकर किडनी की बीमारी वालों में। ज़्यादा स्टेंट अपने आप बुरे नहीं, पर हर एक की साफ़ वजह होनी चाहिए। यह पूछना बिल्कुल जायज़ है: "क्या यह स्टेंट इसलिए लग रहा है कि जाँच में यह ब्लॉकेज खून का बहाव रोकता पाया गया?"

हाँ, सामान्य ज़िंदगी ही अपेक्षा है, अपवाद नहीं। डॉक्टर की इजाज़त के बाद ज़्यादातर दिन 30–40 मिनट चलें; कई मरीज़ साइकिल, जिम और सफ़र सब दोबारा शुरू कर देते हैं। खाना सामान्य हृदय-हितैषी ही है — घर का खाना, कम तेल, कम नमक, कम चीनी, ज़्यादा सब्ज़ी-फल — न भूखा रहना, न महँगे सप्लीमेंट। नहाने, हवाई सफ़र या मोबाइल इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं। असली पाबंदी सिर्फ़ दो हैं: तंबाकू, जो पूरी तरह बंद होना चाहिए, और दवाएँ छोड़ना।

नहीं, स्टेंट से एयरपोर्ट स्कैनर नहीं बजता — उसमें इतनी धातु होती ही नहीं। आधुनिक स्टेंट MRI-कंडीशनल होते हैं, यानी MRI सुरक्षित तरीके से हो सकती है, आमतौर पर स्टेंट लगने के बाद किसी भी समय; रेडियोलॉजिस्ट को स्टेंट के बारे में बताएँ और स्टेंट कार्ड साथ ले जाएँ ताकि वे जानकारी जाँच सकें।

यह इस पर निर्भर है कि नस कितनी जल्दी खुली और कितनी मांसपेशी प्रभावित हुई। जो मांसपेशी सुन्न हुई थी पर मरी नहीं, वह अक्सर हफ़्तों से कुछ महीनों में सुधर जाती है, और फ़ॉलो-अप पर दोबारा इको से पता चलता है कि EF बढ़ा या नहीं। जो मांसपेशी मर गई, वह घाव (स्कार) में बदल जाती है और वापस नहीं आती — इसीलिए हार्ट अटैक के बाद के महीनों में हार्ट फ़ेल्योर की दवाएँ, कार्डियक रिहैबिलिटेशन और सख़्त जोखिम नियंत्रण इतने मायने रखते हैं।

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के लिए प्रथमेश कार्डियक इंस्टिट्यूट क्यों चुनें?

अनुभवी हाथ, सही उपकरण और ईमानदार सलाह — सुरक्षित प्रोसीजर के लिए यही तीन चीज़ें सबसे ज़रूरी हैं।

अनुभवी DM कार्डियोलॉजिस्ट

डॉ. गौरव त्रिपाठी और डॉ. सुलभ चंद्राकर — अनुभवी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट जो नियमित रूप से एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग करते हैं।

आधुनिक कैथ लैब

IVUS और FFR गाइडेंस के साथ 3D एंजियोग्राफी — सुरक्षित और सटीक प्रोसीजर के लिए नवीनतम उपकरण।

24x7 इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर

पूरी तरह सुसज्जित CCU और ऑन-कॉल कैथ लैब टीम, क्योंकि दिल की इमरजेंसी ओपीडी के समय का इंतज़ार नहीं करती।

पारदर्शी शुल्क और बीमा में मदद

प्रोसीजर से पहले खर्च साफ़-साफ़ बताया जाता है, और हमारी टीम यह जाँचने में मदद करती है कि आपकी बीमा पॉलिसी या सरकारी योजना में क्या कवर है।

एक ही छत के नीचे संपूर्ण हृदय देखभाल

ECG, इको, TMT, एंजियोग्राफी, प्रोसीजर और फ़ॉलो-अप — निदान से इलाज तक सब एक जगह।

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वही तकनीक और तरीका जो मेट्रो शहरों के हृदय केंद्रों में होता है — बीमार मरीज़ को दूर ले जाए बिना।

हमारे विशेषज्ञ

विशेषज्ञ और उपलब्ध सुविधाएँ

आपका प्रोसीजर हमारे वरिष्ठ DM कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ खुद प्लान करते और करते हैं। मिलने से पहले आप उनकी पूरी प्रोफ़ाइल पढ़ सकते हैं।

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डॉ. गौरव त्रिपाठी, रायपुर में एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के लिए इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट
इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट

डॉ. गौरव त्रिपाठी

MBBS (ऑनर्स), MD (मेडिसिन), DM (कार्डियोलॉजी), FESC, FSCAI

जटिल कोरोनरी ब्लॉकेज, CTO, रोटाब्लेशन और इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी करते हैं, IVUS और FFR की मदद से सटीक फ़ैसले लेते हैं।

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डॉ. सुलभ चंद्राकर, रायपुर में एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के लिए हृदय रोग विशेषज्ञ
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ

डॉ. सुलभ चंद्राकर

MBBS, MD (मेडिसिन), DM (कार्डियोलॉजी)

एंजियोप्लास्टी करते हैं और दवाओं, बचाव व लंबे फ़ॉलो-अप पर ध्यान देते हुए कोरोनरी रोग का इलाज करते हैं।

प्रथमेश कार्डियक इंस्टिट्यूट की सुविधाएँ

3D एंजियोग्राफी वाली आधुनिक कैथ लैबIVUS और FFR24x7 CCU24x7 हृदय इमरजेंसीECG2D Echo और DopplerTMT (ट्रेडमिल टेस्ट)Holter और 24 घंटे BP मॉनिटरिंगStress और Contrast EchoTEE
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अपनी रिपोर्ट साथ लाएँ। हमारे कार्डियोलॉजिस्ट आसान भाषा में बताएँगे कि एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग आपके लिए सही है या नहीं, क्या उम्मीद करें, और बाकी सभी विकल्प क्या हैं।

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