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बीमारी की जानकारी

रायपुर, छत्तीसगढ़ में हार्ट वाल्व का इलाज

आपके दिल में चार वाल्व होते हैं जो खुलते और बंद होते हैं ताकि खून एक ही दिशा में बहे। जब कोई वाल्व सिकुड़ जाता है या लीक करने लगता है, तो दिल को कहीं ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। रायपुर का प्रथमेश कार्डियक इंस्टिट्यूट पूरे छत्तीसगढ़ के मरीज़ों को हार्ट वाल्व का इलाज देता है। इस पेज पर आसान भाषा में समझाएँगे — यह होता क्या है, कैसे पता चलता है, और कौन सा इलाज वाक़ई काम आता है।

डॉक्टर से बात करें
TAVIबिना ओपन सर्जरी
BMV और BAVबलून वाल्व प्रोसीजर
3D इकोसटीक वाल्व जाँच
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रायपुर के प्रथमेश कार्डियक इंस्टिट्यूट में हृदय वाल्व की बीमारी का इलाज
यह क्या होता है

हार्ट वाल्व की बीमारी क्या होती है?

आपके दिल में चार वाल्व होते हैं — माइट्रल, एओर्टिक, ट्राइकस्पिड और पल्मोनरी। हर वाल्व एक तरफ़ा गेट की तरह काम करता है। यह खुलकर खून को आगे जाने देता है, फिर कसकर बंद हो जाता है ताकि खून वापस न लौटे।

वाल्व की बीमारी का मतलब है कि इनमें से कोई गेट ठीक से काम करना बंद कर चुका है। ऐसा सिर्फ़ दो तरह से होता है। या तो वाल्व सिकुड़कर तंग हो जाता है और पर्याप्त खून निकल नहीं पाता — इसे वाल्व स्टेनोसिस (valve stenosis) कहते हैं। या वाल्व पूरी तरह बंद नहीं होता और खून वापस लीक करता है — इसे वाल्व रिगर्जिटेशन (valve regurgitation) कहते हैं। कभी-कभी एक ही वाल्व में दोनों चीज़ें हो जाती हैं। कौन सा गेट प्रभावित है, उसके हिसाब से रिपोर्ट में माइट्रल, एओर्टिक, ट्राइकस्पिड या पल्मोनरी वाल्व डिजीज लिखा होता है।

इसे अपने घर के गेट की तरह समझिए। अगर गेट आधा अटक गया हो तो एक बार में एक ही आदमी निकल पाता है और बाहर भीड़ लग जाती है — यही सिकुड़ा हुआ वाल्व है। और अगर गेट की कुंडी न लगे और वह खुलता रहे, तो जो बाहर भेजा वही वापस अंदर आ जाता है — यही लीक करता वाल्व है। दोनों हालत में दिल को हर धड़कन पर अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, और सालों में यही अतिरिक्त मेहनत दिल की मांसपेशी को थका देती है।

भारत में कौन सा वाल्व सबसे ज़्यादा प्रभावित होता है?

भारत में माइट्रल वाल्व पश्चिमी देशों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा प्रभावित होता है, और अक्सर कम उम्र में। इसकी वजह है रूमेटिक हृदय रोग (rheumatic heart disease) — बचपन में गले के उस संक्रमण का असर जिसका इलाज ठीक से नहीं हुआ। बहुत से मरीज़ यह सुनकर हैरान होते हैं कि दस साल की उम्र में हुआ गले का इन्फेक्शन पैंतीस की उम्र में वाल्व की समस्या बन गया।

एओर्टिक वाल्व दूसरा आम वाल्व है, जो आमतौर पर बड़ी उम्र में प्रभावित होता है जब उस पर धीरे-धीरे कैल्शियम जमकर उसे सख़्त कर देता है। इसीलिए एओर्टिक वाल्व का सिकुड़ना ज़्यादातर 65 की उम्र के बाद दिखता है।

क्यों होता है

हार्ट वाल्व की समस्या क्यों होती है?

वाल्व की बीमारी के कारण ब्लॉकेज से अलग होते हैं। यह मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल या तले-भुने खाने की वजह से नहीं होती। असली कारण ये हैं।

ये आपके हाथ में हैं

  • बचपन में गले के संक्रमण का इलाज न होना — भारत में यही सबसे बड़ा रोकने लायक़ कारण है। बुख़ार के साथ गले में दर्द को नज़रअंदाज़ न करें, पूरा इलाज कराएँ।
  • रूमेटिक बुख़ार से बचाव के इंजेक्शन बीच में छोड़ देना — इन्हें डॉक्टर के बताए पूरे समय तक जारी रखना होता है
  • बीपी का इलाज न कराना, जो सालों में एओर्टिक वाल्व पर ज़ोर डालता है
  • शरीर में कहीं भी इलाज न हुआ संक्रमण जो खून में पहुँचकर वाल्व पर बैठ जाए
  • दाँतों की सफ़ाई न रखना और दाँत का इन्फेक्शन न ठीक कराना — मुँह के बैक्टीरिया दिल के वाल्व तक पहुँच सकते हैं
  • शुगर का कंट्रोल में न रहना, जिससे वाल्व पर कैल्शियम तेज़ी से जमता है

ये आपके हाथ में नहीं हैं

  • बढ़ती उम्र — दशकों में वाल्व पर कैल्शियम स्वाभाविक रूप से जमता है
  • जन्म से वाल्व का असामान्य होना, जैसे तीन के बजाय दो पल्ले वाला एओर्टिक वाल्व
  • पहले हो चुका रूमेटिक बुख़ार, जब नुक़सान हो चुका हो
  • पहले हुए हार्ट अटैक के बाद का नुक़सान, जो वाल्व की बनावट बिगाड़ सकता है
  • परिवार में वाल्व की बीमारी का इतिहास

रूमेटिक वाल्व की बीमारी काफ़ी हद तक रोकी जा सकती है। अगर घर के किसी बच्चे को बार-बार बुख़ार के साथ गले में दर्द होता है, तो उसका पूरा इलाज कराइए — यही एक क़दम ज़िंदगी भर वाल्व को बचा लेता है।

लक्षण

हार्ट वाल्व की बीमारी के लक्षण क्या हैं?

वाल्व की बीमारी धीरे बढ़ती है। सालों तक दिल इसकी भरपाई करता रहता है और कुछ पता नहीं चलता। लक्षण तभी शुरू होते हैं जब वाल्व काफ़ी प्रभावित हो चुका हो — और इसीलिए समय पर जाँच मायने रखती है।

हार्ट वाल्व की समस्या के लक्षण — शुरुआती संकेत

  • साँस फूलना जो महीनों में लगातार बढ़ता जाए — पहले सीढ़ी चढ़ते समय, फिर सीधी सड़क पर चलते समय, और आख़िर में आराम करते समय भी। यह धीरे-धीरे बढ़ना सबसे पहचाना जाने वाला लक्षण है।
  • पहले के मुक़ाबले बहुत जल्दी थक जाना, बिना किसी और वजह के
  • धड़कन का फड़फड़ाना, तेज़ चलना या बीच में रुक जाना महसूस होना
  • पैरों, टख़नों या पिंडलियों में सूजन, ख़ासकर शाम को
  • रात में साँस फूलने से नींद खुल जाना, या आराम से सोने के लिए दो-तीन तकिए लगाने पड़ना
  • मेहनत करते समय सीने में तकलीफ़ या चक्कर आना — एओर्टिक वाल्व सिकुड़ने में यह आम है
  • डॉक्टर को सीना सुनते समय हार्ट मरमर (एक अतिरिक्त सरसराहट की आवाज़) सुनाई देना, जो अक्सर रूटीन जाँच में पकड़ा जाता है

एक बात परिवार को पता होनी चाहिए: जिस व्यक्ति को वाल्व की समस्या पहले से मालूम है, उसका मेहनत करते समय बेहोश हो जाना कभी छोटी बात नहीं होती। एओर्टिक वाल्व सिकुड़ने में यह गंभीर चेतावनी है और इसके लिए तुरंत कार्डियोलॉजी जाँच चाहिए, इंतज़ार नहीं।

इमरजेंसी के संकेत — इंतज़ार मत कीजिए, तुरंत कॉल कीजिए

वाल्व की बीमारी आमतौर पर धीरे बढ़ती है, लेकिन इन हालात में तुरंत ध्यान चाहिए।

  • अचानक तेज़ साँस फूलना, सीधा लेट न पाना
  • काम करते समय बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • साँस फूलने के साथ सीने में दर्द
  • गुलाबी या खून मिला झागदार बलगम आना
  • बहुत तेज़ या अनियमित धड़कन के साथ चक्कर
  • वाल्व की समस्या होते हुए एक हफ़्ते से ज़्यादा लगातार बुख़ार
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जाँच

हार्ट वाल्व की बीमारी का पता (डायग्नोसिस) कैसे चलता है?

वाल्व की समस्या की जाँच ज़्यादातर अल्ट्रासाउंड (इकोकार्डियोग्राफी) से होती है, इसलिए इसमें दर्द नहीं होता और कोई रेडिएशन नहीं लगता। हर जाँच में क्या होता है, नीचे बताया है ताकि कोई चिंता न रहे।

हार्ट वाल्व की जाँच: 2डी इको (2D Echo)

वाल्व की बीमारी की मुख्य जाँच। दिल का अल्ट्रासाउंड जिसमें हर वाल्व खुलता-बंद होता स्क्रीन पर दिखता है, और नाप लिया जाता है कि वह कितना तंग या कितना लीक कर रहा है।

15–20 मिनटदर्द नहींरेडिएशन नहीं
2डी इको के बारे में

TEE (ट्रांसइसोफेजियल इको)

दिल के पीछे से वाल्व को नज़दीक से देखना, खाने की नली से एक पतली प्रोब डालकर। पहले गला सुन्न किया जाता है और हल्की नींद की दवा दी जाती है, इसलिए आराम रहता है।

20–30 मिनटगला सुन्नखाली पेट आएँ
TEE के बारे में

ईसीजी (ECG)

दिल की बिजली की गतिविधि रिकॉर्ड करती है। इससे पता चलता है कि अतिरिक्त बोझ से दिल की मांसपेशी मोटी हुई है या धड़कन बिगड़ी है।

5 मिनटदर्द नहींकोई तैयारी नहीं
ईसीजी के बारे में

टीएमटी (ट्रेडमिल टेस्ट)

ट्रेडमिल पर चलते हुए ईसीजी। जब लक्षण साफ़ न हों तो यह बताता है कि वाल्व की समस्या असल में आपको कितना रोक रही है।

20–30 मिनटहल्का चलनाडॉक्टर की निगरानी
टीएमटी के बारे में

स्ट्रेस और कॉन्ट्रास्ट इको

दिल पर ज़ोर डालकर किया गया इको। जब आराम की हालत का इको बॉर्डरलाइन हो और इलाज पर फ़ैसला लेना हो, तब काम आता है।

30–45 मिनटकोई चीरा नहींडॉक्टर की निगरानी
स्ट्रेस इको के बारे में

एंजियोग्राफी

बड़ी उम्र के मरीज़ों में वाल्व के किसी भी प्रोसीजर से पहले की जाती है, यह देखने के लिए कि दिल की नसों में भी ब्लॉकेज तो नहीं जिसे साथ ही ठीक करना पड़े।

20–30 मिनटआप जागते रहेंगेअक्सर उसी दिन छुट्टी
एंजियोग्राफी के बारे में
इलाज

हार्ट वाल्व की बीमारी में इलाज की ज़रूरत कब पड़ती है?

हर वाल्व बदलना नहीं पड़ता — बहुत से वाल्व मरीज़ों को कभी कोई प्रोसीजर कराना ही नहीं पड़ता। फ़ैसला इस बात से होता है कि वाल्व की समस्या कितनी गंभीर है, तकलीफ़ हो रही है या नहीं, और दिल की मांसपेशी कैसी है। ईमानदार रास्ता कदम-दर-कदम चलना है।

1

नियमित इको के साथ निगरानी — हल्की और मध्यम वाल्व बीमारी के लिए

अगर वाल्व सिर्फ़ थोड़ा प्रभावित है और कोई तकलीफ़ नहीं है, तो किसी प्रोसीजर की ज़रूरत नहीं। ज़रूरत सिर्फ़ इतनी है कि डॉक्टर के बताए अंतराल पर इको दोहराते रहें, आमतौर पर हर एक-दो साल में। यह "कुछ न करना" नहीं है — यह सही समय पकड़ना है, दिल की मांसपेशी को नुक़सान होने से पहले।

2

दवाइयाँ — तकलीफ़ कम करने और दिल को बचाने के लिए

दवाइयाँ न तंग वाल्व को खोल सकती हैं, न लीक को बंद कर सकती हैं। वे जो कर सकती हैं वह है बीपी कंट्रोल करना, शरीर का अतिरिक्त पानी निकालकर साँस आसान करना, धड़कन को स्थिर रखना और खून के थक्के रोकना। रूमेटिक वाल्व बीमारी में पेनिसिलिन के बचाव वाले इंजेक्शन आगे का नुक़सान रोकते हैं — इन्हें अपने आप कभी बंद न करें।

3

बलून वाल्व प्रोसीजर (BMV / BAV) — सिकुड़े वाल्व का इलाज, बिना ओपन सर्जरी

तंग माइट्रल या एओर्टिक वाल्व के लिए जाँघ में एक छोटे छेद से बलून पहुँचाकर वाल्व के अंदर फुलाया जाता है और वाल्व खुल जाता है। सीने पर चीरा नहीं लगता और हार्ट-लंग मशीन नहीं लगती। बलून माइट्रल वाल्वोटॉमी ख़ासकर रूमेटिक वाल्व बीमारी वाले युवा भारतीय मरीज़ों में बहुत अच्छे लंबे नतीजे देती है।

4

TAVI — कैथेटर से वाल्व बदलना

एओर्टिक वाल्व के ज़्यादा सिकुड़ने पर, ख़ासकर बुज़ुर्गों में या उनमें जिनके लिए ओपन सर्जरी जोखिम भरी है, नया वाल्व जाँघ से कैथेटर के ज़रिए लगाया जा सकता है। पुराना वाल्व किनारे हो जाता है और नया तुरंत काम शुरू कर देता है। ज़्यादातर मरीज़ एक-दो दिन में चलने लगते हैं।

5

ओपन-हार्ट वाल्व सर्जरी — जब यही बेहतर हो

बहुत ख़राब या भारी लीक करते वाल्व के लिए, ख़ासकर कम उम्र के मरीज़ में, सर्जरी से मरम्मत या बदलाव ज़िंदगी भर के लिए बेहतर नतीजा दे सकता है। ऐसी हालत में हम साफ़ बता देंगे और आपको भेजेंगे। सही इलाज चुनना ज़्यादा ज़रूरी है, अपना ही प्रोसीजर चुनना नहीं।

फ़ैसला असल में कैसे होता है: कार्डियोलॉजिस्ट आपके साथ बैठकर इको देखते हैं, दिखाते हैं कि वाल्व क्या कर रहा है, और बताते हैं कि आपके केस में कौन सा विकल्प क्यों ठीक है। उम्र, दिल की मांसपेशी की हालत, आगे प्रेग्नेंसी की योजना है या नहीं, और ज़िंदगी भर खून पतला करने की दवा ले पाएँगे या नहीं — ये सब जवाब बदल देते हैं। एक विकल्प दूसरे से बेहतर क्यों चुना गया, यह समझे बिना आपको नहीं जाना चाहिए।

प्रोसीजर

रायपुर में उपलब्ध वाल्व प्रोसीजर

ये सभी हमारी कैथ लैब में एक छोटे छेद के ज़रिए होते हैं, सीना खोले बिना।

TAVI / TAVR

जाँघ से कैथेटर के ज़रिए नया एओर्टिक वाल्व। सीने पर चीरा नहीं, हार्ट-लंग मशीन नहीं। बुज़ुर्गों और सर्जरी के लिए ज़्यादा जोखिम वाले मरीज़ों के लिए उपयुक्त।

और जानें

BMV (बलून माइट्रल वाल्वोटॉमी)

बलून से तंग माइट्रल वाल्व खोला जाता है। रूमेटिक माइट्रल सिकुड़न का मानक इलाज, बहुत अच्छे लंबे नतीजों के साथ।

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BAV (बलून एओर्टिक वाल्वोटॉमी)

बलून से तंग एओर्टिक वाल्व खोला जाता है। अक्सर किसी निर्णायक प्रोसीजर से पहले मरीज़ को स्थिर करने के लिए किया जाता है।

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बलून पल्मोनरी वाल्वोटॉमी

सिकुड़े हुए पल्मोनरी वाल्व को खोलता है, जो अक्सर जन्म से होने वाली समस्या है और बच्चों या युवाओं में पकड़ी जाती है।

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TEE गाइडेड जाँच

वाल्व प्रोसीजर से पहले और उसके दौरान दिल के पीछे से विस्तृत इमेजिंग, ताकि डिवाइस का सही नाप और सही जगह तय हो।

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एंजियोग्राफी

बड़ी उम्र के मरीज़ों में वाल्व इलाज से पहले नियमित रूप से, ताकि ऐसे ब्लॉकेज छूट न जाएँ जिनका इलाज साथ में होना चाहिए।

और जानें

रायपुर में हार्ट वाल्व विशेषज्ञ के रूप में प्रथमेश ही क्यों

वाल्व की बीमारी में सटीक नाप और सही समय — ये दो चीज़ें बाक़ी सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं।

DM कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ

आपका इको सीनियर कंसल्टेंट ख़ुद पढ़ते हैं और प्रोसीजर भी ख़ुद करते हैं, किसी जूनियर स्टाफ़ को नहीं सौंपते।

3D इमेजिंग वाली आधुनिक कैथ लैब

TAVI, BMV और BAV सब यहीं होते हैं, उस इमेजिंग सपोर्ट के साथ जो इन प्रोसीजर के लिए ज़रूरी है।

24x7 सीसीयू

किसी भी वाल्व प्रोसीजर के बाद लगातार निगरानी, क्योंकि शुरुआती दिन ही सबसे ध्यान माँगते हैं।

समय पर ईमानदार सलाह

अगर आपके वाल्व को अभी इलाज की ज़रूरत नहीं है, तो हम इंतज़ार करने और दोबारा जाँच कराने को कहेंगे। बहुत जल्दी ऑपरेशन करने से किसी का फ़ायदा नहीं।

सब कुछ एक ही छत के नीचे

इको, TEE, एंजियोग्राफी, प्रोसीजर और ज़िंदगी भर का फ़ॉलो-अप रायपुर में एक ही जगह — अस्पतालों के चक्कर नहीं।

रूमेटिक वाल्व का अनुभव

मध्य भारत में रूमेटिक वाल्व की बीमारी आम है और इसका तरीक़ा पश्चिमी किताबों से अलग होता है। हमारी टीम इसे नियमित रूप से देखती है।

हमारे विशेषज्ञ

आपका इलाज कौन करेगा

आपका केस सीधे हमारे किसी सीनियर हृदय रोग विशेषज्ञ के हाथ में रहता है। आने से पहले आप उनकी पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं।

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डॉ. गौरव त्रिपाठी, रायपुर में हृदय वाल्व की बीमारी का इलाज करने वाले इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट
इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट

डॉ. गौरव त्रिपाठी

MBBS, MD (मेडिसिन), DM (कार्डियोलॉजी)

TAVI, बलून वाल्व प्रोसीजर और स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन करते हैं, IVUS और FFR की मदद से सही फ़ैसला लेते हैं।

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डॉ. सुलभ चंद्राकर, रायपुर में वाल्व रोग के वरिष्ठ हृदय विशेषज्ञ
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ

डॉ. सुलभ चंद्राकर

MBBS, MD (मेडिसिन), DM (कार्डियोलॉजी)

वाल्व की जाँच, दवाइयों से इलाज, वाल्व के साथ आने वाली धड़कन की गड़बड़ी और लंबे समय का फ़ॉलो-अप देखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मरीज़ हमसे सबसे ज़्यादा ये सवाल पूछते हैं

आपके दिल में चार वाल्व होते हैं — माइट्रल, एओर्टिक, ट्राइकस्पिड और पल्मोनरी — जो एक तरफ़ा गेट की तरह काम करते हैं। हार्ट वाल्व की बीमारी का मतलब है कि इनमें से कोई वाल्व सिकुड़कर तंग हो गया है (स्टेनोसिस), या पूरी तरह बंद न होकर खून वापस लीक कर रहा है (रिगर्जिटेशन)। दोनों हालत में दिल को हर धड़कन पर ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, और सालों में इससे दिल की मांसपेशी थक सकती है।

सबसे आम लक्षण है साँस फूलना जो महीनों में धीरे-धीरे बढ़ता जाए — पहले सीढ़ी पर, फिर सीधी सड़क पर, और बाद में आराम करते समय भी। जल्दी थकना, धड़कन तेज़ महसूस होना, पैरों में सूजन, सोने के लिए ज़्यादा तकिए लगना, और मेहनत पर सीने में तकलीफ़ या चक्कर भी हो सकते हैं। शुरुआत में बहुत से लोगों को कोई लक्षण नहीं होता, और समस्या तब पकड़ में आती है जब डॉक्टर को मरमर सुनाई देती है।

भारत में सबसे आम वजह रूमेटिक हृदय रोग है — बचपन में गले के उस संक्रमण का असर जिसका पूरा इलाज नहीं हुआ, और यह ज़्यादातर माइट्रल वाल्व को प्रभावित करता है। बड़ी उम्र में एओर्टिक वाल्व पर धीरे-धीरे कैल्शियम जमना मुख्य कारण है। इसके अलावा जन्म से असामान्य वाल्व, वाल्व पर संक्रमण बैठ जाना, और हार्ट अटैक के बाद का नुक़सान भी कारण हो सकते हैं।

अक्सर शुरुआत तब होती है जब डॉक्टर को सीना सुनते समय मरमर सुनाई देती है। मुख्य जाँच 2डी इको है, जो हर वाल्व को खुलते-बंद होते दिखाता है और नापता है कि वह कितना तंग या लीक है। ज़रूरत हो तो TEE से नज़दीक से देखा जाता है, ईसीजी से धड़कन जाँची जाती है, और जब लक्षण व इको मेल न खाएँ तो टीएमटी या स्ट्रेस इको मदद करते हैं।

हाँ। इको वाल्व की बीमारी की मुख्य जाँच है — यही एक आसान जाँच है जो सच में दिखाती है कि हर वाल्व कैसे काम कर रहा है और समस्या कितनी गंभीर है। इसमें लगभग बीस मिनट लगते हैं, दर्द नहीं होता और रेडिएशन नहीं लगता। वाल्व की बीमारी पता चलने के बाद नियमित अंतराल पर इको दोहराकर ही डॉक्टर इलाज का सही समय तय करते हैं।

बिना लक्षण वाली हल्की और मध्यम वाल्व बीमारी में आमतौर पर सिर्फ़ नियमित इको जाँच और ज़रूरत हो तो दवाइयाँ चाहिए। प्रोसीजर की सलाह आमतौर पर तब दी जाती है जब वाल्व की समस्या गंभीर हो जाए, जब वह साँस फूलना, सीने में दर्द या बेहोशी देने लगे, या जब इको में दिल की मांसपेशी बढ़ती या कमज़ोर होती दिखे। मक़सद है दिल की मांसपेशी को स्थायी नुक़सान से पहले इलाज करना।

हाँ। हल्के लीक में अक्सर सिर्फ़ नियमित इको से निगरानी और बीपी कंट्रोल व अतिरिक्त पानी निकालने की दवाइयाँ काफ़ी होती हैं। जो गंभीर लीक साँस फुला रहा हो, या दिल को बड़ा या कमज़ोर कर रहा हो, उसका इलाज आमतौर पर सर्जरी से वाल्व की मरम्मत या बदलाव करके होता है। सही समय आपके इको की माप से तय होता है।

बहुत से मामलों में, हाँ। हल्की और मध्यम वाल्व बीमारी दवाइयों और नियमित इको फ़ॉलो-अप से संभाली जाती है। तंग माइट्रल या एओर्टिक वाल्व को अक्सर जाँघ के छोटे छेद से बलून प्रोसीजर (BMV या BAV) से खोला जा सकता है, और एओर्टिक वाल्व के ज़्यादा सिकुड़ने पर TAVI से, बिना सीना खोले, कैथेटर के ज़रिए नया वाल्व लगाया जा सकता है। कुछ बहुत ख़राब वाल्वों में ओपन सर्जरी ही बेहतर रहती है, और कार्डियोलॉजिस्ट बताएँगे कि आपके लिए कौन सा विकल्प ठीक है।

मरमर का मतलब है डॉक्टर को खून के बहाव में हलचल सुनाई दी, और बहुत सी मरमर पूरी तरह हानिरहित होती हैं। पक्का जानने का इकलौता तरीक़ा इको है, जिसमें बीस मिनट लगते हैं, दर्द नहीं होता और रेडिएशन नहीं लगता। अगर कुछ नहीं निकला तो चिंता ख़त्म। और अगर कुछ है तो वह जल्दी पकड़ में आ गया, जो सबसे अच्छी स्थिति है।

हमेशा नहीं। BMV जैसे बलून प्रोसीजर के बाद आमतौर पर नहीं। टिश्यू वाल्व के साथ TAVI के बाद आमतौर पर कुछ समय की दवा और नियमित गोलियाँ। मैकेनिकल वाल्व बदलने के बाद हाँ — ज़िंदगी भर, समय-समय पर INR जाँच के साथ।

बहुत सी महिलाओं की हो सकती है, लेकिन योजना बनाकर। प्रेग्नेंसी में दिल को कहीं ज़्यादा खून पंप करना पड़ता है, जिससे पहले से प्रभावित वाल्व पर ज़ोर पड़ता है। अगर वाल्व की बीमारी है और प्रेग्नेंसी की सोच रही हैं, तो गर्भधारण से पहले कार्डियोलॉजिस्ट से मिलिए, क्योंकि कुछ वाल्व समस्याएँ पहले ठीक करना बेहतर होता है और कुछ दवाइयाँ बदलनी पड़ती हैं।

सीढ़ी चढ़ते साँस फूलती है? वाल्व की जाँच करा लीजिए।

इको में बीस मिनट लगते हैं, दर्द नहीं होता और रेडिएशन नहीं लगता। अगर किसी रिपोर्ट में पहले से वाल्व की बात लिखी है, तो उसे साथ लाइए और दूसरी राय लीजिए — आपको साफ़ बताया जाएगा कि इलाज अभी चाहिए या सुरक्षित रूप से इंतज़ार किया जा सकता है।

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