अनियमित धड़कन (अरिद्मिया) क्या होती है?
आपके दिल का अपना बिजली का सिस्टम होता है। दिल के ऊपरी हिस्से में कोशिकाओं का एक छोटा समूह, जिसे साइनस नोड कहते हैं, बिजली का संकेत भेजता है। यह संकेत एक तय रास्ते से नीचे जाता है और दिल के कक्षों को सही क्रम में सिकुड़ने को कहता है। इसी से एक स्थिर, समान धड़कन बनती है।
अरिद्मिया (arrhythmia — दिल की धड़कन का अनियमित होना, जिसे हार्ट रिदम डिसऑर्डर भी कहते हैं) का मतलब है कि उस बिजली के संकेत में कुछ गड़बड़ हो गई है। वह बहुत तेज़ चल सकता है, बहुत धीमा, ग़लत जगह से निकल सकता है, या शॉर्ट-सर्किट वाला रास्ता ले सकता है। दिल की मांसपेशी बिल्कुल स्वस्थ हो सकती है — गड़बड़ी वायरिंग में है, पंप में नहीं।
इसे घर की बिजली की वायरिंग की तरह समझिए। पंखा ठीक है और मोटर भी ठीक है, लेकिन अगर स्विच ढीला हो या तार में शॉर्ट सर्किट हो, तो पंखा कभी तेज़, कभी धीमा चलता है या झटके लेता है। अरिद्मिया में बिल्कुल यही होता है। इसीलिए जिस व्यक्ति का इको पूरी तरह सामान्य है, उसे भी धड़कन की गंभीर समस्या हो सकती है — पंप ठीक है, वायरिंग नहीं।
तीन प्रकार जो आपको जानने चाहिए
बहुत तेज़ (टैकीकार्डिया) — आराम की हालत में भी धड़कन 100 प्रति मिनट से ऊपर चली जाती है। सबसे आम गंभीर प्रकार है एट्रियल फिब्रिलेशन (AFib), जिसमें ऊपरी कक्ष ठीक से धड़कने के बजाय काँपते हैं। AFib इसलिए मायने रखता है क्योंकि खून एक जगह जमकर थक्का बना सकता है, और वह थक्का दिमाग़ तक जाकर लकवा कर सकता है।
बहुत धीमी (ब्रैडीकार्डिया) — धड़कन लगभग 50 प्रति मिनट से नीचे गिर जाती है और पर्याप्त खून नहीं पहुँचा पाती। इससे थकान, चक्कर और बेहोशी होती है। इसका निर्णायक इलाज पेसमेकर है।
अतिरिक्त या छूटी हुई धड़कन — सबसे आम, और आमतौर पर हानिरहित। जो "धक" या पल भर का रुकना आप महसूस करते हैं, वह अक्सर बस एक अतिरिक्त धड़कन होती है। ऐसे ज़्यादातर लोगों को इलाज नहीं, बस एक आसान जाँच और तसल्ली चाहिए होती है।
धड़कन अनियमित क्यों होती है?
धड़कन की गड़बड़ी के कारण ब्लॉकेज से बिल्कुल अलग होते हैं। कुछ ऐसे ट्रिगर हैं जिन्हें आप आज ही हटा सकते हैं, कुछ बनावट से जुड़े हैं।
ये आपके हाथ में हैं
- बहुत ज़्यादा चाय, कॉफ़ी या एनर्जी ड्रिंक — बहुत आम और पूरी तरह हटाया जा सकने वाला कारण
- तंबाकू और शराब — ख़ासकर शराब एट्रियल फिब्रिलेशन शुरू कर सकती है, कभी-कभी ज़्यादा पीने के अगले ही दिन
- थायराइड की गड़बड़ी, ख़ासकर बढ़ा हुआ थायराइड — एक आसान खून की जाँच इसे पकड़ लेती है, और इसका इलाज अक्सर धड़कन ठीक कर देता है
- पोटैशियम, सोडियम या मैग्नीशियम की कमी, जो अक्सर उल्टी, दस्त या पेशाब बढ़ाने वाली दवा के बाद होती है
- खून की कमी (एनीमिया), जिससे दिल भरपाई के लिए तेज़ धड़कता है
- चिंता, घबराहट और नींद की भारी कमी
- सर्दी, दमा और वज़न घटाने की कुछ दवाइयाँ जो दिल को उत्तेजित करती हैं
- सालों से इलाज न हुआ बीपी और शुगर
ये आपके हाथ में नहीं हैं
- बढ़ती उम्र — दशकों में दिल की वायरिंग स्वाभाविक रूप से कमज़ोर होती है
- पहले हुए हार्ट अटैक का नुक़सान, जिससे बना निशान संकेतों में रुकावट डालता है
- वाल्व की समस्या, ख़ासकर रूमेटिक माइट्रल वाल्व की बीमारी, जो भारत में आमतौर पर AFib की वजह बनती है
- कमज़ोर या बढ़ा हुआ दिल (कार्डियोमायोपैथी)
- जन्म से मौजूद एक अतिरिक्त बिजली का रास्ता
- परिवार में धड़कन की गड़बड़ी या अचानक हृदय गति रुकने का इतिहास
चूँकि बहुत से कारण हटाए जा सकते हैं, इसलिए पहली जाँच में आमतौर पर थायराइड, हीमोग्लोबिन और नमक-खनिज की खून जाँच शामिल होती है। कई मरीज़ों में सिर्फ़ इन्हीं का इलाज करने से धड़कन ठीक हो जाती है।
घबराहट (पैल्पिटेशन) और अरिद्मिया के दूसरे लक्षण
धड़कन की गड़बड़ी का कोई भरोसा नहीं होता। यह मिनटों में आकर चली जाती है, इसीलिए सामान्य ईसीजी में अक्सर पकड़ में नहीं आती। कल जो महसूस हुआ वह आज की जाँच में न दिखे — यह सामान्य है, इसका मतलब यह नहीं कि कुछ है ही नहीं।
आम लक्षण — धड़कन तेज़, अनियमित या बहुत धीमी चलना
- धड़कन का एहसास होना — अपनी ही धड़कन का फड़फड़ाना, दौड़ना, ज़ोर से बजना या बीच में छूट जाना महसूस होना। बहुत लोग इसे सीने में मछली फड़फड़ाने जैसा बताते हैं।
- अचानक दिल का दौड़ना — बहुत तेज़ धड़कन के दौरे जो अपने आप शुरू और बंद हो जाते हैं
- असामान्य थकान और हल्के काम में भी साँस फूलना
- चक्कर या सिर हल्का लगना, ख़ासकर खड़े होते समय
- दौरे के दौरान सीने में तकलीफ़
- धीमी धड़कन (नब्ज़ का बहुत धीमा होना), सिर में भारीपन या शरीर धीमा पड़ने जैसा महसूस होना
- दौरे के दौरान बिना वजह घबराहट या बेचैनी
वह एक लक्षण जिसे कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना: बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना। धड़कन की गड़बड़ी से हुई बेहोशी का मतलब है दिमाग़ तक कुछ पल के लिए पर्याप्त खून नहीं पहुँचा। इसके लिए ठीक जाँच चाहिए, सिर्फ़ तसल्ली नहीं। अगर यह गाड़ी चलाते या सीढ़ी पर हो जाए, तो अकेले चोट का ख़तरा ही इसे ज़रूरी बना देता है।
इमरजेंसी के संकेत — इंतज़ार मत कीजिए, तुरंत कॉल कीजिए
इन हालात में तुरंत इलाज चाहिए, अगले हफ़्ते की ओपीडी नहीं।
- बेहोशी या गिर जाना, चेतावनी के साथ या बिना
- बहुत तेज़ धड़कन जो कुछ मिनटों में शांत न हो
- धड़कन के साथ सीने में दर्द
- धड़कन के साथ तेज़ साँस फूलना
- अचानक एक तरफ़ कमज़ोरी या सुन्नपन, या बोलने में लड़खड़ाहट
- नब्ज़ का बेहद धीमा महसूस होना, साथ में भ्रम की स्थिति
अरिद्मिया का पता (डायग्नोसिस) कैसे चलता है?
धड़कन की गड़बड़ी में असली मुश्किल उसे मौक़े पर पकड़ना है। पाँच मिनट की ईसीजी सिर्फ़ पाँच मिनट देखती है। इसीलिए लंबी निगरानी अक्सर सबसे अहम जाँच होती है।
ईसीजी (ECG)
पहली जाँच। सीने पर स्टिकर लगाकर दिल की बिजली की गतिविधि रिकॉर्ड की जाती है। अगर उस समय गड़बड़ी मौजूद है तो तुरंत दिख जाती है।
ईसीजी के बारे मेंघबराहट के लिए होल्टर टेस्ट (24 / 48 घंटे)
धड़कन की गड़बड़ी की सबसे अहम जाँच। एक छोटा रिकॉर्डर पहनकर आप अपना रोज़ का काम करते हैं, जिससे वे दौरे पकड़ में आते हैं जो छोटी ईसीजी छोड़ देती है। जब भी कुछ महसूस हो, एक छोटी डायरी में लिख लीजिए।
होल्टर के बारे में2डी इको (2D Echo)
देखता है कि दिल की बनावट, पम्पिंग या वाल्व तो धड़कन की गड़बड़ी की वजह नहीं। किसी भी इलाज का फ़ैसला लेने से पहले ज़रूरी।
2डी इको के बारे मेंटीएमटी (ट्रेडमिल टेस्ट)
बताता है कि गड़बड़ी ख़ास तौर पर मेहनत करते समय आती है या नहीं, जिससे निदान और इलाज दोनों बदल जाते हैं।
टीएमटी के बारे में24 घंटे बीपी मॉनिटरिंग
अक्सर होल्टर के साथ की जाती है, क्योंकि बीपी का ऊपर-नीचे होना और धड़कन की गड़बड़ी अक्सर साथ चलते हैं।
बीपी मॉनिटरिंग के बारे मेंEPS (इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी)
निर्णायक जाँच। पतले तार दिल तक पहुँचाकर यह नक़्शा बनाया जाता है कि ख़राब बिजली का सर्किट ठीक कहाँ है। अगर ख़राब जगह मिल जाए तो उसी बैठक में एब्लेशन से इलाज भी हो जाता है।
EPS और RFA के बारे मेंअरिद्मिया का इलाज कैसे होता है?
हर अनियमित धड़कन का इलाज ज़रूरी नहीं — ज़्यादातर घबराहट और फड़फड़ाहट हानिरहित निकलती है। जाँच का मक़सद ही यही है कि हानिरहित को गंभीर से अलग किया जा सके। इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि आपको कौन सा प्रकार है।
ट्रिगर हटाइए — शुरुआत हमेशा यहीं से
चाय, कॉफ़ी और एनर्जी ड्रिंक कम कीजिए। तंबाकू और शराब बंद कीजिए। खून की कमी, पोटैशियम की कमी और थायराइड ठीक कराइए। नींद सुधारिए। बहुत से मरीज़ों में, ख़ासकर कम उम्र के जिन्हें घबराहट होती है, सिर्फ़ इतने से ही धड़कन ठीक हो जाती है और कोई दवा कभी ज़रूरी नहीं पड़ती।
दवाइयाँ — रफ़्तार, लय और थक्के के ख़तरे को काबू करने के लिए
रेट कंट्रोल की गोलियाँ तेज़ धड़कन को धीमा करती हैं। रिदम कंट्रोल की दवाइयाँ सामान्य लय बनाए रखने की कोशिश करती हैं। एट्रियल फिब्रिलेशन में अक्सर खून पतला करने की दवा जोड़ी जाती है, और यही सबसे अहम हिस्सा है — यही लकवे से बचाती है। खून पतला करने की दवा कार्डियोलॉजिस्ट से पूछे बिना कभी बंद न करें।
RF एब्लेशन — कई तेज़ धड़कनों का स्थायी समाधान
EPS के दौरान जब ख़राब बिजली का रास्ता मिल जाता है, तो उसी कैथेटर से नियंत्रित रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा देकर उसे बंद कर दिया जाता है। कई प्रकार की तेज़ धड़कन में यह लगभग स्थायी इलाज है, और बहुत से मरीज़ों की दवाइयाँ बाद में छूट जाती हैं।
पेसमेकर — जब दिल बहुत धीमा धड़क रहा हो
कॉलरबोन के नीचे त्वचा के भीतर एक छोटा उपकरण लगाया जाता है, जिसके पतले तार दिल तक जाते हैं। यह लगातार आपकी धड़कन पर नज़र रखता है और सिर्फ़ तभी हल्का बिजली का संकेत देता है जब दिल बहुत धीमा हो जाए। यह आपकी धड़कन अपने हाथ में नहीं लेता, बस उसे ख़तरनाक हद तक गिरने से रोकता है।
ICD या CRT — ज़्यादा जोखिम वाले मरीज़ों के लिए
अगर दिल की पम्पिंग कमज़ोर है या किसी ख़तरनाक लय का जोखिम है, तो ICD उसे पहचानकर अपने आप ठीक कर सकता है। CRT कमज़ोर दिल के दोनों हिस्सों को फिर से साथ धड़कने में मदद करता है। ये सिर्फ़ ख़ास मरीज़ों को, सावधानी से जाँच के बाद ही सलाह किए जाते हैं।
ईमानदार बात: घबराहट की शिकायत लेकर आने वाले ज़्यादातर लोग तसल्ली और जीवनशैली सुधार लेकर लौटते हैं, कोई डिवाइस लेकर नहीं। जाँच का मक़सद पक्का करना है। एक बार प्रकार पता चल जाए तो इलाज आमतौर पर सीधा और बहुत असरदार होता है।
रायपुर में उपलब्ध धड़कन से जुड़े प्रोसीजर
ये सभी हमारी कैथ लैब में होते हैं। इनमें से किसी में भी सीना नहीं खोला जाता।
EPS + RF एब्लेशन
ख़राब बिजली के सर्किट का नक़्शा बनाकर उसी बैठक में बंद कर देता है। कई तेज़ धड़कनों में यह लगभग स्थायी समाधान है।
और जानेंस्थायी पेसमेकर (PPI)
सिंगल या डुअल चैंबर। ख़तरनाक रूप से धीमी धड़कन और बार-बार बेहोशी का निर्णायक इलाज।
और जानेंICD लगाना
ख़तरनाक लय को पहचानकर अपने आप ठीक करता है। अचानक हृदय गति रुकने के जोखिम वाले मरीज़ों के लिए सलाह दी जाती है।
और जानेंCRT-P / CRT-D
कमज़ोर दिल के दोनों हिस्सों को फिर साथ धड़कने में मदद करता है, जिससे चुनिंदा मरीज़ों में पम्पिंग और साँस दोनों बेहतर होती हैं।
और जानेंडिवाइस जाँच और प्रोग्रामिंग
पहले से लगे पेसमेकर और ICD की फ़ॉलो-अप में जाँच और प्रोग्रामिंग होती है, और बैटरी की स्थिति देखी जाती है।
और जानेंएंजियोग्राफी
तब की जाती है जब धड़कन की गड़बड़ी के पीछे कोई ब्लॉकेज हो सकता है जिसका इलाज पहले करना ज़रूरी है।
और जानेंरायपुर में हार्ट रिदम विशेषज्ञ के रूप में प्रथमेश ही क्यों
धड़कन की गड़बड़ी में जीत इस बात से मिलती है कि दौरा पकड़ में आए और उसे सही पढ़ा जाए। मशीनें और अनुभव दोनों यही तय करते हैं।
DM कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ
आपका होल्टर सीनियर कंसल्टेंट ख़ुद पढ़ते हैं और डिवाइस भी ख़ुद लगाते हैं, किसी जूनियर स्टाफ़ को नहीं सौंपते।
EPS और RF एब्लेशन यहीं
ख़राब सर्किट का नक़्शा बनाकर उसी बैठक में इलाज हो जाता है, दूसरे शहर भेजने की ज़रूरत नहीं।
24x7 सीसीयू निगरानी
ख़तरनाक लय को देखना पड़ता है, इंतज़ार नहीं किया जा सकता। लगातार निगरानी चौबीसों घंटे उपलब्ध है।
ईमानदार, ज़रूरत के हिसाब से सलाह
अगर आपकी घबराहट हानिरहित है, तो हम साफ़ कह देंगे। हर फड़फड़ाते दिल को डिवाइस या ज़िंदगी भर की दवा नहीं चाहिए।
सब कुछ एक ही छत के नीचे
ईसीजी, होल्टर, इको, EPS, डिवाइस लगाना और ज़िंदगी भर का फ़ॉलो-अप — सब रायपुर में एक ही जगह।
लंबे समय का डिवाइस फ़ॉलो-अप
पेसमेकर एक बार का काम नहीं है। नियमित जाँच और बैटरी की निगरानी घर के पास होने से इसे निभाना कहीं आसान रहता है।
आपका इलाज कौन करेगा
आपका केस सीधे हमारे किसी सीनियर हृदय रोग विशेषज्ञ के हाथ में रहता है। आने से पहले आप उनकी पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं।
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डॉ. गौरव त्रिपाठी
EPS, RF एब्लेशन और डिवाइस लगाने के साथ-साथ इमरजेंसी और जटिल कोरोनरी इंटरवेंशन भी करते हैं।
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डॉ. सुलभ चंद्राकर
धड़कन की गड़बड़ी, पेसमेकर और ICD लगाना, डिवाइस फ़ॉलो-अप और बचाव पर विशेष ध्यान देते हैं।
मरीज़ हमसे सबसे ज़्यादा ये सवाल पूछते हैं
ज़्यादातर लोगों में वजह हानिरहित अतिरिक्त या छूटी हुई धड़कनें होती हैं, जो अक्सर ज़्यादा चाय-कॉफ़ी, तनाव, नींद की कमी, शराब या तंबाकू से शुरू होती हैं। कभी-कभी वजह थायरॉइड, कम हीमोग्लोबिन या कम पोटैशियम होती है, जो खून की जाँच से पता चल जाती है। कम मामलों में गड़बड़ी दिल से ही आती है — पुराने हार्ट अटैक का निशान, वाल्व की समस्या, कमज़ोर दिल या जन्म से मौजूद एक अतिरिक्त बिजली का रास्ता। ईसीजी और होल्टर से आमतौर पर पता चल जाता है कि आप किस समूह में हैं।
अनियमित धड़कन तब होती है जब दिल का बिजली का संकेत बहुत तेज़, बहुत धीमा, ग़लत जगह से या शॉर्ट-सर्किट वाले रास्ते से चलने लगे। हटाए जा सकने वाले ट्रिगर हैं — कैफ़ीन, शराब, तंबाकू, थायरॉइड, कम पोटैशियम या मैग्नीशियम, ख़ून की कमी, नींद की कमी और कुछ दवाइयाँ। न बदलने वाले कारण हैं — बढ़ती उम्र, पहले हार्ट अटैक का नुक़सान, वाल्व की बीमारी, कार्डियोमायोपैथी और जन्म से मौजूद अतिरिक्त रास्ता।
आमतौर पर नहीं। कभी-कभार अतिरिक्त या छूटी धड़कन स्वस्थ लोगों में भी बहुत आम है। लेकिन कुछ अरिद्मिया मायने रखती हैं — एट्रियल फिब्रिलेशन से लकवे का ख़तरा बढ़ता है, बहुत धीमी धड़कन से बेहोशी हो सकती है, और निचले कक्षों से आने वाली कुछ तेज़ धड़कनें जानलेवा हो सकती हैं। जाँच से ही हानिरहित और गंभीर धड़कन में फ़र्क़ होता है।
अगर घबराहट बार-बार हो, कुछ मिनटों से ज़्यादा रहे, या साथ में चक्कर, साँस फूलना या सीने में तकलीफ़ हो, तो डॉक्टर को दिखाइए। अगर पहले से दिल की कोई समस्या है, या परिवार में अचानक हृदय गति रुकने का इतिहास है, तब भी जाँच कराइए। बेहोशी या बेहोशी जैसा लगना, या घबराहट के साथ सीने में दर्द या तेज़ साँस फूलना — इनमें इमरजेंसी इलाज चाहिए, ओपीडी का इंतज़ार नहीं।
जाँच ईसीजी से शुरू होती है, और अगर उसमें गड़बड़ी न पकड़ी जाए तो होल्टर मॉनिटर रोज़ के काम के दौरान 24 से 48 घंटे धड़कन रिकॉर्ड करता है। 2डी इको से देखा जाता है कि दिल की बनावट या वाल्व इसके पीछे तो नहीं, और खून की जाँच से थायरॉइड, हीमोग्लोबिन और इलेक्ट्रोलाइट देखे जाते हैं। मेहनत पर लक्षण आएँ तो टीएमटी, और एब्लेशन की सोच हो तो EPS से ख़राब सर्किट का नक़्शा बनाया जाता है।
हाँ, अगर ईसीजी रिकॉर्ड होते समय गड़बड़ी चल रही हो। मुश्किल यह है कि ईसीजी सिर्फ़ कुछ मिनट रिकॉर्ड करती है, और बहुत सी धड़कन की गड़बड़ियाँ आती-जाती रहती हैं। इसीलिए सामान्य ईसीजी से अरिद्मिया न होना पक्का नहीं होता, और अक्सर अगला कदम होल्टर मॉनिटर होता है।
जब घबराहट, चक्कर या बेहोशी आती-जाती रहे और सामान्य ईसीजी में न पकड़ी जाए, तब होल्टर की ज़रूरत पड़ती है। यह धड़कन की दवाइयाँ कितना असर कर रही हैं, छिपा हुआ एट्रियल फिब्रिलेशन, और पेसमेकर का फ़ैसला लेने से पहले धीमी धड़कन जाँचने के लिए भी किया जाता है। इसे 24 या 48 घंटे पहनना होता है और जब कुछ महसूस हो तो समय लिख लेना होता है।
इलाज प्रकार पर निर्भर करता है। बहुत से लोगों को सिर्फ़ ट्रिगर हटाने होते हैं — चाय-कॉफ़ी कम, तंबाकू और शराब बंद, अच्छी नींद, और थायरॉइड या ख़ून की कमी का इलाज। कुछ को रफ़्तार या लय कंट्रोल करने की दवा चाहिए, और एट्रियल फिब्रिलेशन में साथ में खून पतला करने की दवा। कुछ तेज़ धड़कनें RF एब्लेशन से ठीक होती हैं, और ख़तरनाक रूप से धीमी धड़कन का इलाज पेसमेकर से होता है।
नहीं। यह ओपन-हार्ट सर्जरी नहीं है। डिवाइस कॉलरबोन के नीचे त्वचा के नीचे एक छोटे चीरे से, लोकल एनेस्थीसिया में लगाया जाता है, और आप जागते रहते हैं। इसमें आमतौर पर लगभग एक घंटा लगता है, और ज़्यादातर मरीज़ अगले दिन घर चले जाते हैं और कुछ हफ़्तों में सामान्य काम करने लगते हैं।
कई प्रकार की तेज़ धड़कन में हाँ — यह लगभग स्थायी इलाज जैसा है, और बहुत से मरीज़ों की दवाइयाँ बाद में बंद हो जाती हैं। एट्रियल फिब्रिलेशन में नतीजे अच्छे हैं लेकिन यह कभी-कभी लौट सकता है, और दोबारा प्रोसीजर की ज़रूरत पड़ सकती है। फ़ैसला लेने से पहले आपके कार्डियोलॉजिस्ट ईमानदारी से बताएँगे कि आपकी धड़कन किस समूह में आती है।
क्योंकि असली ख़तरा लक्षण नहीं, लकवे (स्ट्रोक) का ख़तरा है। AFib में ऊपरी कक्ष धड़कने के बजाय काँपते हैं, इसलिए खून जमकर थक्का बना सकता है जो दिमाग़ तक जा सकता है। इसीलिए खून पतला करने वाली दवा अक्सर धड़कन की रफ़्तार वाली दवा से भी ज़्यादा ज़रूरी होती है। इसे अपने आप कभी बंद न करें — कोई भी बदलाव आपके कार्डियोलॉजिस्ट ही तय करेंगे।