पैरों की धमनी में ब्लॉकेज क्या होता है?
पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ (PAD), जिसे पेरिफेरल वैस्कुलर डिज़ीज़ भी कहते हैं, का मतलब है — हाथ या पैर में खून पहुँचाने वाली धमनियाँ सिकुड़ गई हैं या बंद हो गई हैं। पैरों में यह ज़्यादा होता है। सीधी भाषा में — जिस "नस" की लोग बात करते हैं, वह असल में खून ले जाने वाली धमनी है, और उसमें गाद जम गई है।
कारण वही है जो दिल की नस ब्लॉक करता है — एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis), यानी धमनी की दीवार में धीरे-धीरे कोलेस्ट्रॉल, चर्बी और कैल्शियम जमना। मांसपेशी को काम करते समय ज़्यादा खून चाहिए। जब पाइप पतला हो जाता है, तो आराम करते समय पिंडली को खून मिल जाता है, लेकिन चलना शुरू करते ही खून कम पड़ जाता है — और यही कमी दर्द बनकर महसूस होती है।
पानी के पाइप को सोचिए जिसमें अंदर गाद जम गई है। धीमी धार में पानी पौधों तक पहुँच जाता है। लेकिन जैसे ही आप नल पूरा खोलकर ज़्यादा पानी माँगते हैं, धार कम पड़ जाती है। आपकी पिंडली वही पौधा है — बैठे रहने पर ठीक, चलने पर भूखी। इसीलिए पैरों की धमनी ब्लॉकेज का दर्द चलने पर आता है और खड़े होकर रुकने पर चला जाता है।
यह बात पैर से आगे क्यों मायने रखती है?
यह बात मरीज़ों को बहुत कम बताई जाती है। अगर कोलेस्ट्रॉल ने आपके पैरों की धमनियाँ ब्लॉक की हैं, तो लगभग तय है कि यही प्रक्रिया आपके दिल और दिमाग़ की धमनियों में भी चल रही है। पैरों की धमनी ब्लॉकेज पूरे शरीर के लिए एक चेतावनी है।
इसीलिए पैर की नस के ब्लॉकेज को कभी अकेले पैर की बीमारी मानकर इलाज नहीं किया जाता। पूरी हार्ट जाँच इलाज का हिस्सा होती है — कई मरीज़ों को इसी मौके पर दिल का छिपा ब्लॉकेज पता चलता है, जब वह आसानी से ठीक हो सकता है। इस मायने में पैर का दर्द एक भाग्यशाली चेतावनी भी है।
पैरों की नस ब्लॉक क्यों होती है?
यह बीमारी सालों में बनती है। इसके पीछे के ज़्यादातर कारण आपके काबू में हैं — इसीलिए जल्दी पता चलना इतना बड़ा फ़र्क़ डालता है।
ये आपके हाथ में हैं
- सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू, गुटखा, खैनी — सबसे बड़ा कारण; तंबाकू लेने वालों में यह बीमारी बहुत जल्दी और बहुत ज़्यादा गंभीर होती है
- डायबिटीज़, खासकर जब सालों तक शुगर काबू में न रहे — भारत में तंबाकू के बाद सबसे बड़ा कारण
- हाई ब्लड प्रेशर, जो धमनी की अंदरूनी परत को धीरे-धीरे खराब करता है
- ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल और ज़्यादा ट्राइग्लिसराइड
- मोटापा और पूरी तरह बैठे रहने वाली दिनचर्या
- किडनी की बीमारी, खासकर डायलिसिस पर चल रहे मरीज़ों में
- होमोसिस्टीन (homocysteine) का बढ़ा हुआ स्तर, जिसका इलाज न हो
- पैर के छोटे घाव या कड़ी त्वचा को नज़रअंदाज़ करना, जब तक वह ज़ख़्म न बन जाए
ये आपके हाथ में नहीं हैं
- 50 साल से ऊपर की उम्र, और 65 के बाद बहुत ज़्यादा
- पुरुष होना — हालाँकि महिलाओं में मेनोपॉज़ के बाद ख़तरा तेज़ी से बढ़ता है
- परिवार में जल्दी हार्ट अटैक, स्ट्रोक या पैर की नस ब्लॉकेज का इतिहास
- पहले हुआ हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी या स्ट्रोक — यही बीमारी दूसरी धमनी में
- बचपन से चल रही टाइप 1 डायबिटीज़
अगर आप सिगरेट या तंबाकू लेते हैं और चलने पर पैर में दर्द होता है, तो यह बात साफ़ समझ लीजिए — तंबाकू छोड़ना आपके पैरों के लिए किसी भी दवा या प्रोसीज़र से ज़्यादा काम करता है। जो मरीज़ एंजियोप्लास्टी के बाद भी तंबाकू जारी रखते हैं, उनकी नस कुछ महीनों में फिर ब्लॉक हो जाती है।
PAD के लक्षण क्या हैं?
लक्षणों का एक बहुत साफ़ पैटर्न होता है, और एक बार पहचान लें तो चूकना मुश्किल है। दिक्कत यह है कि लगभग हर कोई इसे उम्र, कमज़ोरी या नस की समस्या समझ लेता है।
चलते समय पैरों में दर्द और पैरों में खून का दौरा कम होने के अन्य संकेत
- पिंडली, जाँघ या कूल्हे में जकड़न भरा दर्द जो एक तय दूरी चलने के बाद शुरू होता है और खड़े होकर दो-तीन मिनट रुकने पर चला जाता है। दूरी आमतौर पर हर बार वही रहती है — "मैं नुक्कड़ की दुकान तक चल लेता हूँ, फिर रुकना पड़ता है।" यही इस बीमारी का सबसे ख़ास लक्षण है, जिसे क्लॉडिकेशन कहते हैं।
- चलने की दूरी महीनों में घटती जाना — पहले 500 मीटर, फिर 200, फिर बस गेट तक। यह घटना दर्द से भी ज़्यादा अहम संकेत है।
- एक पैर या पंजा दूसरे से ठंडा लगना — अपने हाथ से या किसी और के छूने पर
- पैर में सुन्नपन, झुनझुनी या भारीपन, जिसे अक्सर नस या रीढ़ की समस्या समझ लिया जाता है
- पैर की त्वचा चमकदार, पतली और बालों से खाली हो जाना; नाखून धीरे बढ़ना और मोटे हो जाना
- पंजे या उंगली पर कटा, छाला या दरार जो हफ़्तों तक भरता ही नहीं
- पंजे का रंग पीला या नीला पड़ जाना, खासकर पैर ऊपर उठाने पर
- रात में बिस्तर पर पंजे में दर्द, जो पैर नीचे लटकाने या बैठ जाने पर कम होता है
- पैर की मांसपेशी कमज़ोर होना और पिंडली साफ़ तौर पर पतली दिखना
सबसे ज़रूरी फ़र्क़: धमनी ब्लॉकेज का दर्द चलने पर आता है और आराम करने पर चला जाता है। रीढ़ या नस (nerve) की समस्या का दर्द अक्सर आराम में भी रहता है, बैठने-खड़े होने से बदलता है, और जलन या करंट जैसा नीचे तक जाता है। कई मरीज़ सालों तक हड्डी का इलाज कराते रहते हैं, जबकि असल दिक्कत धमनी की होती है। अगर आपका दर्द "चलो-रुको-आराम" का साफ़ पैटर्न बनाता है, तो कृपया पैर की धमनियों की जाँच करा लें।
इमरजेंसी के संकेत — इंतज़ार मत कीजिए, तुरंत कॉल कीजिए
ये संकेत बताते हैं कि पैर में खून की सप्लाई बहुत कम हो गई है। यहाँ दिन नहीं, घंटे मायने रखते हैं — पैर बचेगा या नहीं, यह इसी से तय होता है।
- अचानक पैर में तेज़ दर्द के साथ पैर ठंडा, पीला या नीला पड़ जाना
- अचानक पैर या पंजा हिला न पाना, या उसमें कुछ महसूस न होना
- पैर का घाव या उंगली काली पड़ जाना
- घाव से बदबू आना, लालिमा फैलना या बुख़ार आना
- पंजे में लगातार दर्द जो आराम करने पर भी अब बिल्कुल कम नहीं होता
- टखने या पंजे पर नाड़ी (pulse) महसूस न होना
PAD के लिए कौन सी जाँचें होती हैं?
पैर की नस की पहली दो जाँचें दर्द रहित, जल्दी हो जाने वाली और सस्ती हैं। आमतौर पर किसी भी अंदरूनी जाँच की ज़रूरत पड़ने से पहले ही ये बीमारी पकड़ लेती हैं।
ABI (एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स)
हाथ और टखने का ब्लड प्रेशर नापकर दोनों की तुलना की जाती है। टखने का रीडिंग कम आना बताता है कि पंजे तक खून ठीक से नहीं पहुँच रहा। आसान, दर्द रहित, और अक्सर यही पहली जाँच बीमारी पक्की कर देती है।
सभी जाँचें देखेंपैर की नस की जाँच: कलर डॉप्लर
एक अल्ट्रासाउंड जो पैर की धमनियों में बहते खून को दिखाता है और बताता है कि कहाँ नस सिकुड़ी है। कोई सुई नहीं, कोई रेडिएशन नहीं — सिर्फ़ जेल लगाकर प्रोब घुमाई जाती है।
डॉप्लर के बारे में पढ़ेंपेरिफेरल एंजियोग्राफी
पैर की धमनियों की डाई जाँच, जो हर ब्लॉकेज की सही जगह और लंबाई का नक्शा बना देती है। इसी से तय होता है कि एंजियोप्लास्टी हो सकती है या नहीं, और गुब्बारा कहाँ लगेगा।
एंजियोग्राफी के बारे में पढ़ेंखून की जाँचें
शुगर, HbA1c, कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल, किडनी फंक्शन और हीमोग्लोबिन। ये ब्लॉकेज के पीछे का कारण बताती हैं और किसी भी प्रोसीज़र से पहले ज़रूरी हैं।
सभी जाँचें देखेंCT एंजियोग्राफी
पैर की धमनियों का विस्तृत स्कैन, जब डॉप्लर साफ़ तस्वीर न दे या जटिल केस की योजना बनानी हो। नस में डाई का इंजेक्शन लगता है।
सभी जाँचें देखेंदिल की जाँच (ECG, इको)
चूँकि पैर की नस ब्लॉक होने का मतलब अक्सर दिल की नसें भी ख़तरे में होना है, ईसीजी और 2डी इको से हार्ट जाँच पूरी PAD जाँच का हिस्सा है — कोई अलग या फ़ालतू टेस्ट नहीं।
हार्ट ब्लॉकेज पेजक्या पैरों की बंद नसों का इलाज हो सकता है?
ज़्यादातर मामलों में हाँ — और अब बड़े ऑपरेशन के बिना भी। पैर की धमनियाँ अब एक छोटे सुराख़ के ज़रिए गुब्बारे और स्टेंट से खोली जा सकती हैं, ठीक वैसे ही जैसे दिल की नसें। नतीजा इस बात से तय होता है कि मरीज़ कितनी जल्दी आया।
तंबाकू पूरी तरह छोड़ें — यह सलाह नहीं, इलाज है
तंबाकू चलते रहने पर इस सूची की बाकी कोई चीज़ ठीक से काम नहीं करती। सिगरेट और तंबाकू धमनी को सिकोड़ते हैं और ब्लॉकेज तेज़ करते हैं, और इलाज की गई नस दोबारा ब्लॉक होने का सबसे आम कारण यही है। जो मरीज़ छोड़ देते हैं, उनकी चलने की दूरी कई बार कुछ हफ़्तों में ही बढ़ने लगती है — किसी प्रोसीज़र से पहले ही।
निगरानी में पैदल चलना — जिसे मरीज़ कम आँकते हैं
दर्द शुरू होने तक चलना, आराम करना, फिर चलना — रोज़ तीस से पैंतालीस मिनट। दो-तीन महीने में इससे चलने की दूरी सच में बढ़ती है, क्योंकि ब्लॉकेज के आसपास छोटे रास्ते (side channels) बनने लगते हैं। सुनने में बहुत आसान लगता है, पर असर में यह सबसे कारगर चीज़ों में से एक है।
धमनी बचाने वाली दवाएँ
सिकुड़ी जगह पर थक्का न बने इसके लिए खून पतला करने वाली दवा, जमाव को स्थिर रखने के लिए कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा, और शुगर-बीपी का सख़्त काबू। कुछ मरीज़ों को चलने की दूरी बढ़ाने वाली दवाएँ भी दी जाती हैं। ये लंबे समय की दवाएँ हैं, कोई छोटा कोर्स नहीं।
पैर की नस की एंजियोप्लास्टी और स्टेंट
एक पतला तार ब्लॉकेज तक पहुँचाया जाता है, गुब्बारा उसे खोलता है, और अक्सर स्टेंट डालकर नस खुली रखी जाती है। यह जाँघ या हाथ में एक छोटे सुराख़ से, लोकल एनेस्थीसिया में होता है — आप होश में रहते हैं, और ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन या अगले दिन घर चले जाते हैं। जब दर्द रोज़मर्रा की ज़िंदगी रोक रहा हो, या आराम में भी दर्द हो, या घाव न भर रहा हो — तब यही आम इलाज है।
बायपास सर्जरी, जब गुब्बारा ठीक न बैठे
बहुत लंबे या ज़्यादा कैल्शियम जमे ब्लॉकेज में सर्जरी से खून का रास्ता ब्लॉकेज के इर्द-गिर्द घुमा दिया जाता है। सही मरीज़ में यह आज भी बहुत बढ़िया विकल्प है। एंजियोप्लास्टी या बायपास — यह फ़ैसला एंजियोग्राफी की रिपोर्ट से होता है, पसंद से नहीं।
पैर की देखभाल और घाव का इलाज
जिन मरीज़ों को पहले से ज़ख़्म है, उनके लिए नस खोलना आधा काम है। घाव की सही ड्रेसिंग, संक्रमण का इलाज, दबाव हटाना और शुगर काबू — ये सब साथ चलें तभी घाव भरता है। रोज़ पैर देखना जीवनभर की आदत बन जानी चाहिए।
हर मरीज़ के सवाल का ईमानदार जवाब: नहीं, पैर के हर ब्लॉकेज में स्टेंट की ज़रूरत नहीं होती। हल्के क्लॉडिकेशन वाले कई मरीज़ तंबाकू छोड़ने, चलने के प्रोग्राम और दवाओं से ही बहुत बेहतर हो जाते हैं, और उन्हें सिर्फ़ फॉलो-अप पर रखा जाता है। प्रोसीज़र तब सलाह दी जाती है जब दर्द सच में रोज़ की ज़िंदगी रोक रहा हो, या आराम में दर्द हो, या घाव न भर रहा हो, या खून की सप्लाई ख़तरनाक हद तक कम हो। अगर कोई हल्के दर्द में बेसिक इलाज आज़माए बिना सीधे स्टेंट की सलाह दे, तो कारण पूछना आपका पूरा हक़ है।
रायपुर में उपलब्ध पैर की धमनी की प्रोसीज़र
ये सभी प्रथमेश में उपलब्ध हैं। कौन सी लगेगी, यह ब्लॉकेज की जगह, उसकी लंबाई और पंजे तक पहुँच रहे खून पर निर्भर करता है।
पेरिफेरल एंजियोग्राफी
पैर की धमनियों के हर ब्लॉकेज का नक्शा बनाकर इलाज की सही योजना तय करती है। होश में, छोटे सुराख़ से।
और जानेंलेग एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग
बंद पैर की धमनी को गुब्बारे से खोलकर स्टेंट से खुली रखती है — बिना बड़ा ऑपरेशन, आमतौर पर उसी या अगले दिन छुट्टी।
और जानेंघुटने के नीचे की धमनियों की एंजियोप्लास्टी
घुटने के नीचे की पतली धमनियों के ब्लॉकेज के लिए — डायबिटिक फुट का घाव भरने और पैर बचाने की कुंजी अक्सर यही होती है।
और जानेंथक्का घोलना / निकालना
जब थक्के से नस अचानक बंद हो जाए और पैर ठंडा-पीला पड़ जाए, तब हर घंटा कीमती होता है।
और जानेंकलर डॉप्लर जाँच
दर्द रहित अल्ट्रासाउंड जो सिकुड़ाव की जगह बताता है, और इलाज के बाद नस की निगरानी में भी काम आता है।
और जानेंकोरोनरी एंजियोग्राफी
उसी मरीज़ की दिल की नसें जाँचती है, क्योंकि पैर और दिल के ब्लॉकेज लोगों की सोच से कहीं ज़्यादा साथ-साथ चलते हैं।
और जानेंरायपुर में पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ के इलाज के लिए प्रथमेश क्यों
पैरों की धमनी ब्लॉकेज में कुछ हफ़्तों की देरी पैर की कीमत ले सकती है। घर के पास, और ऐसी टीम से इलाज जो दिल की भी जाँच करे — यही सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
DM कार्डियोलॉजी इंटरवेंशनल टीम
लेग एंजियोप्लास्टी वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट पूरी सुविधा वाले कैथ लैब में करते हैं — दिल की प्रोसीज़र जैसी ही सावधानी के साथ।
दिल और पैर की जाँच साथ
पैर के ब्लॉकेज वाले मरीज़ की उसी विज़िट में दिल की छिपी बीमारी की जाँच होती है। कई मरीज़ों को यहीं इलाज लायक कोरोनरी ब्लॉकेज पता चलता है।
पैर बचाने पर पूरा ज़ोर
डायबिटिक फुट सहित हर केस में लक्ष्य है खून की सप्लाई लौटाना और पैर बचाना। अंग काटना आख़िरी रास्ता है, शुरुआती सलाह नहीं।
पहले दर्द रहित जाँचें
ABI और कलर डॉप्लर हर अंदरूनी जाँच से पहले। एंजियोग्राफी तभी सलाह दी जाती है जब इलाज की योजना सच में उस पर निर्भर हो।
डायबिटिक फुट का साथ-साथ इलाज
शुगर काबू, घाव की देखभाल और धमनी का इलाज एक साथ — क्योंकि तीन में से एक भी छूट जाए तो घाव नहीं भरता।
रायपुर में ही फॉलो-अप
डॉप्लर रिव्यू, दवाओं का समायोजन और पैर की जाँच यहीं जारी रहती है — हर कुछ महीने बड़े शहर जाने की ज़रूरत नहीं।
आपका इलाज कौन करेगा
आपका केस सीधे हमारे किसी सीनियर हृदय रोग विशेषज्ञ के हाथ में रहता है। आने से पहले आप उनकी पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं।
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डॉ. गौरव त्रिपाठी
पेरिफेरल एंजियोग्राफी और पैर की धमनी की एंजियोप्लास्टी करते हैं, जिसमें डायबिटिक फुट के लिए घुटने के नीचे का काम भी शामिल है।
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डॉ. सुलभ चंद्राकर
जोखिम कारकों की जाँच, दवाओं, शुगर और कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन, और चलने के प्रोग्राम व लंबे फॉलो-अप की निगरानी करते हैं।
मरीज़ हमसे सबसे ज़्यादा ये सवाल पूछते हैं
पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ (PAD) का मतलब है कि पैरों (और कभी-कभी हाथों) तक खून ले जाने वाली धमनियाँ सिकुड़ गई हैं या बंद हो गई हैं। इसका कारण एथेरोस्क्लेरोसिस है, यानी धमनी की दीवार में धीरे-धीरे कोलेस्ट्रॉल, चर्बी और कैल्शियम जमना — वही प्रक्रिया जो दिल की नसें ब्लॉक करती है। इससे पैरों की मांसपेशियों तक खून का बहाव कम हो जाता है, ख़ासकर चलते समय।
सबसे ख़ास लक्षण है पिंडली, जाँघ या कूल्हे में जकड़न भरा दर्द जो एक तय दूरी चलने के बाद शुरू हो और खड़े होकर कुछ मिनट रुकने पर चला जाए। दूसरे संकेत हैं एक पैर का दूसरे से ठंडा रहना, पैरों में सुन्नपन, चमकदार और बिना बालों की त्वचा, धीरे बढ़ते नाखून और न भरने वाला घाव। गंभीर PAD में रात को या आराम में भी पंजे में दर्द होता है।
अगर दर्द हर बार एक तय दूरी के बाद आता है और दो-तीन मिनट आराम से चला जाता है, तो पैर की धमनी सिकुड़ी होने की संभावना बहुत ज़्यादा है: आराम में मांसपेशी को खून मिल जाता है, चलते समय नहीं। जो दर्द आराम में भी रहे, बैठने-खड़े होने से बदले या जलन के साथ नीचे तक जाए, वह अक्सर रीढ़ या नर्व की समस्या होती है। ABI और कलर डॉप्लर बिना दर्द के यह सवाल हल कर देते हैं।
डॉक्टर पहले चलने पर दर्द का पैटर्न पूछते हैं और पंजों की नाड़ी जाँचते हैं। फिर ABI टखने और हाथ के ब्लड प्रेशर की तुलना करता है, और कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड ठीक-ठीक दिखाता है कि धमनी कहाँ सिकुड़ी है। एंजियोग्राफी तभी की जाती है जब किसी प्रोसीजर की योजना बन रही हो।
हाँ। हल्के मामलों में तंबाकू छोड़ने, रोज़ चलने के प्रोग्राम और खून पतला करने, कोलेस्ट्रॉल, शुगर व बीपी की दवाओं से सुधार होता है। जब दर्द रोज़ की ज़िंदगी रोके या घाव न भरे, तो लोकल एनेस्थीसिया में एक छोटे सुराख़ से लेग एंजियोप्लास्टी और स्टेंट से नस खोली जाती है, और आमतौर पर उसी या अगले दिन छुट्टी मिल जाती है। बहुत लंबे या ज़्यादा कैल्शियम वाले ब्लॉकेज के लिए बायपास सर्जरी रखी जाती है।
मुख्य जाँचें हैं ABI (एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स) और पैरों का कलर डॉप्लर, दोनों दर्द रहित और बिना रेडिएशन। खून की जाँच से शुगर, HbA1c, कोलेस्ट्रॉल और किडनी देखी जाती है। इलाज से पहले CT एंजियोग्राफी या पेरिफेरल एंजियोग्राफी ब्लॉकेज का नक्शा बनाती है, और ईसीजी व इको से दिल की जाँच होती है, क्योंकि दिल और पैर के ब्लॉकेज अक्सर साथ चलते हैं।
हो सकता है। बंद धमनियों से खून का दौरा कम होने पर घाव भरना बंद हो सकता है और लंबे समय तक अनदेखी करने पर पैर को ख़तरा हो सकता है। यह इस बात की चेतावनी भी है कि दिल और दिमाग़ की धमनियाँ भी प्रभावित हो सकती हैं। जल्दी पता चले तो इसका इलाज बहुत अच्छी तरह होता है, इसलिए ठंडे पैर, चलने पर दर्द या धीरे भरते घाव की जाँच करानी चाहिए।
अगर हर बार एक तय दूरी चलने पर पैरों में दर्द हो, चलने की दूरी घटती जा रही हो, या पंजे का घाव दो-तीन हफ़्तों में न भरे, ख़ासकर डायबिटीज़ में, तो विशेषज्ञ को दिखाइए। सुन्नपन या ठंडे पैर वाले तंबाकू लेने वालों और डायबिटीज़ के मरीज़ों को भी जाँच करानी चाहिए। अचानक तेज़ दर्द के साथ पैर ठंडा-पीला पड़ना या उंगली काली होना इमरजेंसी है।
हिंदी में "नस" शब्द दोनों के लिए इस्तेमाल होता है, और इससे असली उलझन पैदा होती है। पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ में धमनी सिकुड़ती है — यानी पैर तक खून ले जाने वाला पाइप — कोई नर्व नहीं। दोनों का इलाज पूरी तरह अलग है, इसीलिए यह फ़र्क़ शुरू में ही साफ़ होना बहुत ज़रूरी है।
बेकाबू शुगर इसका एक हिस्सा है, लेकिन हफ़्तों तक न भरने वाला घाव बहुत बार यह भी बताता है कि पंजे तक खून की सप्लाई कम है। जिस घाव को पर्याप्त खून नहीं मिल रहा, उसे कोई ड्रेसिंग या एंटीबायोटिक नहीं भर सकता। कृपया ABI और पैर का डॉप्लर करा लें, क्योंकि कई बार खून की सप्लाई लौटाना ही वह चीज़ होती है जिससे घाव आख़िरकार भरता है।
ज़्यादातर मरीज़ों में नहीं। अंग काटने का ख़तरा मुख्य रूप से तब बनता है जब मरीज़ बहुत देर से आए — काली उंगली, गहरा संक्रमित घाव, या कई दिनों से खून की सप्लाई बंद पैर लेकर। समय पर खून की सप्लाई लौटा दी जाए तो ज़्यादातर पैर बच जाते हैं, इसीलिए पैर का दर्द और न भरने वाला घाव महीनों तक देखते रहना ठीक नहीं है।