एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी
दिल की नसों की ब्लॉकेज पहले एंजियोग्राफी से देखी जाती है और फिर बैलून व स्टेंट से अंदर से खोली जाती है — कलाई में एक छोटे छेद से, सीने पर कोई चीरा नहीं।
इनवेसिव
कोरोनरी एंजियोग्राफी
यह जाँच साफ़ बताती है कि दिल की नसों में ब्लॉकेज कहाँ और कितनी है। कलाई से पतली ट्यूब, डाई और लाइव एक्स-रे — लगभग 20 मिनट में।
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इनवेसिव
एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग
सिकुड़ी या बंद नस को बैलून से खोला जाता है और ड्रग-इल्यूटिंग स्टेंट से खुला रखा जाता है। ज़्यादातर मरीज़ उसी शाम चलने लगते हैं और एक-दो दिन में घर।
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इनवेसिव
प्राइमरी एंजियोप्लास्टी (हार्ट अटैक)
हार्ट अटैक के दौरान की जाने वाली इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी। गोल्डन आवर्स में बंद नस खोलकर दिल की मांसपेशी बचाई जाती है। कैथ लैब 24x7 उपलब्ध।
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इनवेसिव
कॉम्प्लेक्स और CTO एंजियोप्लास्टी
उन नसों के लिए जो महीनों से 100% बंद हैं, या कई और मुश्किल ब्लॉकेज — जहाँ मरीज़ों को अक्सर सिर्फ़ बायपास की सलाह दी जाती है।
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इनवेसिव
रोटाब्लेशन एंजियोप्लास्टी
जब कैल्शियम नस को पत्थर जैसा सख़्त बना देता है और बैलून नहीं खोल पाता, तब हीरे की नोक वाला छोटा बर कैल्शियम छीलता है, जिससे स्टेंट ठीक बैठ सके।
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इनवेसिव
IVUS और FFR निर्देशित PCI
नस के अंदर से ही इमेजिंग और प्रेशर माप, जिससे स्टेंट वहीं लगे जहाँ सच में ज़रूरत है — और सही तरीके से लगे।
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इनवेसिव
पेरिफेरल एंजियोप्लास्टी
दिल के बाहर की बंद धमनियाँ — आमतौर पर पैरों की — बैलून और स्टेंट से खोली जाती हैं। चलने पर पैर दर्द और न भरने वाले घाव में, पैर कटने से बचाने के लिए।
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इनवेसिव
रीनल एंजियोप्लास्टी
सिकुड़ी किडनी धमनी को बैलून और स्टेंट से खोला जाता है। तीन-चार दवाओं पर भी न काबू होने वाले BP की असली वजह अक्सर यही होती है।
पूरी जानकारी पढ़िएहृदय वाल्व प्रोसीजर
सिकुड़े हृदय वाल्व को कैथेटर के ज़रिए खोला जा सकता है — और चुने हुए मरीज़ों में बदला भी जा सकता है — सीना खोले बिना और हार्ट-लंग मशीन के बिना।
इनवेसिव
बैलून माइट्रल वाल्वोटॉमी (BMV / PTMC)
सिकुड़ा माइट्रल वाल्व, जो आमतौर पर बचपन के रूमेटिक बुख़ार से होता है, पैर की नस से बैलून डालकर खोला जाता है — न सर्जरी, न सीने पर चीरा।
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इनवेसिव
बैलून एऑर्टिक वाल्वोटॉमी (BAV)
सख़्त एऑर्टिक वाल्व को बैलून से खोला जाता है। बच्चों व युवाओं में, और कभी-कभी बहुत गंभीर मरीज़ों में वाल्व बदलने से पहले सहारे के रूप में।
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इनवेसिव
बैलून पल्मोनरी वाल्वोटॉमी
सिकुड़ा पल्मोनरी वाल्व, जो अक्सर जन्म से होता है, बैलून से खोला जाता है। बहुत से बच्चों में यही एक प्रोसीजर पूरा इलाज होता है।
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इनवेसिव
TAVI / TAVR
बहुत सिकुड़ा एऑर्टिक वाल्व पैर से कैथेटर के ज़रिए बदला जाता है। उन बुज़ुर्ग मरीज़ों के लिए जिन्हें ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए ज़्यादा जोखिम बताया गया है।
पूरी जानकारी पढ़िएडिवाइस क्लोज़र — दिल में छेद
जन्म से मौजूद छेद पैर की नस से छोटा डिवाइस डालकर बंद किए जा सकते हैं। बच्चा आमतौर पर अगले दिन घर चला जाता है, सीने पर कोई निशान नहीं।
इनवेसिव
ASD / VSD डिवाइस क्लोज़र
दिल के कक्षों के बीच की दीवार में छेद छतरी जैसे डिवाइस से बंद किया जाता है — उपयुक्त मामलों में ओपन-हार्ट सर्जरी के बिना।
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इनवेसिव
PDA डिवाइस क्लोज़र
एक छोटी रक्त नली जो जन्म के बाद बंद हो जानी चाहिए थी, कैथेटर से कॉइल या डिवाइस डालकर बंद की जाती है — ज़्यादातर बच्चों में डे-केयर प्रोसीजर।
पूरी जानकारी पढ़िएपेसमेकर, ICD और धड़कन का इलाज
धड़कन बहुत धीमी, बहुत तेज़ या ख़तरनाक रूप से अनियमित होने पर — डिवाइस जो धड़कन संभालते हैं, और एब्लेशन जो कुछ समस्याओं को जड़ से ठीक कर सकता है।
इनवेसिव
परमानेंट पेसमेकर (PPI)
कॉलरबोन के पास त्वचा के नीचे लगाया जाने वाला छोटा डिवाइस, जो धड़कन को ख़तरनाक रूप से धीमी होने से रोकता है। लोकल एनेस्थीसिया में लगभग एक घंटे में।
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इनवेसिव
ICD इम्प्लांटेशन
दिखने में पेसमेकर जैसा, लेकिन दिल के जानलेवा रिदम में जाने पर यह ख़ुद जान बचाने वाला शॉक भी देता है। अचानक मृत्यु के जोखिम वाले मरीज़ों के लिए।
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इनवेसिव
CRT-P / CRT-D
उस हार्ट फ़ेल्योर के लिए जहाँ दिल के कक्ष एक साथ नहीं धड़कते। डिवाइस उन्हें फिर से तालमेल में लाता है, जिससे साँस फूलना घटता है और पंपिंग सुधरती है।
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इनवेसिव
EPS और RF एब्लेशन
दिल की बिजली की वायरिंग का नक़्शा बनाकर ख़राब सर्किट ढूँढा जाता है और रेडियोफ़्रीक्वेंसी से बंद कर दिया जाता है। SVT व कई अरिद्मिया में यह स्थायी इलाज है।
पूरी जानकारी पढ़िएनॉन-इनवेसिव हृदय जाँचें
ये जाँचें बिना चीरा, बिना कैथेटर और बिना भर्ती होती हैं। ज़्यादातर मिनटों में पूरी हो जाती हैं, और मिलकर तय करती हैं कि आगे कुछ करने की ज़रूरत है या नहीं।
नॉन-इनवेसिव
ECG टेस्ट
लगभग 5 मिनट में दिल की बिजली जैसी गतिविधि की 12-लीड रिकॉर्डिंग। दर्द-रहित, कोई तैयारी नहीं, और आमतौर पर सबसे पहली हृदय जाँच।
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नॉन-इनवेसिव
2D इकोकार्डियोग्राफी
धड़कते दिल का अल्ट्रासाउंड। पंपिंग की ताक़त, वाल्व और कक्षों का आकार स्क्रीन पर लाइव दिखते हैं — न रेडिएशन, न सुई, लगभग 20 मिनट।
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नॉन-इनवेसिव
बच्चों और बड़ों का Echo
वही दर्द-रहित Echo, नवजात और बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी — मर्मर, नीला पड़ना, वज़न न बढ़ना या दिल में छेद के संदेह पर।
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नॉन-इनवेसिव
TMT (ट्रेडमिल टेस्ट)
ECG देखते हुए आप ट्रेडमिल पर चलते हैं, जिससे मेहनत में दिल का व्यवहार दिखता है। यह अक्सर वह ब्लॉकेज पकड़ता है जो आराम के ECG में छूट जाती है।
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नॉन-इनवेसिव
स्ट्रेस और कॉन्ट्रास्ट Echo
Echo की तस्वीरें पहले आराम में और फिर तनाव की हालत में ली जाती हैं, जिससे दिल की कमज़ोर मांसपेशी दिखती है। TMT न हो पाने या अस्पष्ट रहने पर उपयोगी।
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नॉन-इनवेसिव
Holter मॉनिटरिंग (24 घंटे ECG)
छोटा ECG रिकॉर्डर जिसे आप सामान्य दिनचर्या में 24 से 48 घंटे पहनते हैं। यह वे धड़कन, पॉज़ और बेहोशी पकड़ता है जो 10 सेकंड का ECG नहीं पकड़ पाता।
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नॉन-इनवेसिव
24 घंटे BP मॉनिटरिंग (ABPM)
आपका BP दिन-रात हर 15 से 30 मिनट पर अपने आप नापा जाता है। यह असली हाई BP को क्लिनिक की घबराहट से अलग करता है और रात का BP दिखाता है।
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नॉन-इनवेसिव
TEE (ट्रांसइसोफ़ेजियल Echo)
पतली प्रोब से खाने की नली के अंदर से लिया गया बहुत साफ़ Echo, हल्की नींद की दवा के साथ। जब वाल्व, थक्का या छेद बारीकी से देखना हो।
पूरी जानकारी पढ़िएइनवेसिव या नॉन-इनवेसिव — फ़र्क़ क्या है?
ये दो शब्द डरावने लगते हैं, पर ये सिर्फ़ यह बताते हैं कि काम कैसे होता है — यह नहीं कि दिल की बीमारी कितनी गंभीर है। ऊपर हर कार्ड पर यही छोटा बॉक्स यह बताता है।
इनवेसिव — कैथ लैब में
कलाई या जाँघ में एक छोटे छेद से पतली ट्यूब (कैथेटर) शरीर में डाली जाती है, आमतौर पर लोकल एनेस्थीसिया में, आप होश में रहते हैं। सीने पर कोई चीरा नहीं लगता और हार्ट-लंग मशीन नहीं लगती। एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, वाल्व प्रोसीजर और पेसमेकर इसी में आते हैं।
- आप आमतौर पर होश में, लोकल एनेस्थीसिया पर
- लगभग 1 से 2 दिन की भर्ती
- यह ओपन-हार्ट सर्जरी नहीं है
नॉन-इनवेसिव — बाहर से होने वाली जाँचें
शरीर के अंदर कुछ नहीं डाला जाता। सीने पर स्टिकर, त्वचा पर घुमाई जाने वाली प्रोब, या एक दिन पहनने वाला रिकॉर्डर। न चीरा, न कैथेटर, न भर्ती — आप चलकर आते हैं और चलकर जाते हैं। ये जाँचें आमतौर पर पहले होती हैं और अक्सर यही तय कर देती हैं कि आगे कुछ करने की ज़रूरत नहीं है।
- दर्द-रहित, ज़्यादातर जाँचों में सुई नहीं
- रिपोर्ट उसी दिन
- जितनी बार ज़रूरत हो, दोहराना सुरक्षित
आमतौर पर क्रम इस तरह रहता है
परामर्श और बुनियादी जाँचें
डॉक्टर आपकी जाँच करते हैं और ECG व 2D Echo से शुरुआत होती है। इस चरण में कुछ भी इनवेसिव नहीं।
ज़रूरत हो तो स्ट्रेस टेस्ट
TMT या स्ट्रेस Echo बताता है कि मेहनत में दिल कैसा रहता है। बहुत से मरीज़ साफ़ रिपोर्ट के साथ यहीं रुक जाते हैं।
एंजियोग्राफी तभी, जब सही कारण हो
अगर जाँचें असली ब्लॉकेज की ओर इशारा करें, तो एंजियोग्राफी उसे ठीक-ठीक दिखाती है। यह पहला इनवेसिव कदम है।
उपयुक्त हो तो उसी बैठक में इलाज
एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग अक्सर एंजियोग्राफी के तुरंत बाद हो जाती है, जिससे दो बार छेद नहीं करना पड़ता।