शुरुआत कैसे हुई — धीरे-धीरे, महीनों में
कोई एक डरावनी रात नहीं थी, छाती में तेज़ दर्द भी नहीं। यह सब चुपचाप शुरू हुआ था, लगभग एक साल पहले। दो गली दूर मंदिर जाते समय रास्ते में एक बार रुकना पड़ने लगा, फिर दो बार, और फिर उन्होंने जाना ही छोड़ दिया। घर की सीढ़ी चढ़ने पर वे रेलिंग पकड़कर खड़ी रह जातीं और साँस तेज़ चलने लगती। परिवार ने समझा उमर का असर है। “अठहत्तर साल की हैं,” वे कहते, “और क्या होगा?”
फिर एक दोपहर, सीढ़ी के बीच में ही, उनकी आँखों के आगे अंधेरा आ गया और उन्हें वहीं सीढ़ी पर बैठना पड़ा। वे पूरी तरह बेहोश नहीं हुईं, लेकिन कुछ सेकंड के लिए उन्हें पता नहीं चला कि वे कहाँ हैं। यही वह इशारा था जिसे “कमज़ोरी” कहकर टाला नहीं जा सकता था।
एक और अस्पताल में Echo पहले ही हो चुका था और वाल्व की दिक्कत दिख चुकी थी। परिवार को बता दिया गया था कि अब ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए उमर ज़्यादा है और शरीर कमज़ोर है। वे हमारे पास सेकंड ओपिनियन के लिए आए, ज़्यादातर यही पूछने कि कुछ किया भी जा सकता है या नहीं।
उन्हें जो तकलीफ़ें थीं — और जिन्हें परिवार गलती से उमर मान लेता है
ध्यान दीजिए: यह एक प्रतिनिधि (representative) केस है, जो हमारे यहाँ नियमित रूप से आने वाले वाल्व के केसों को मिलाकर समझाने के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई बातें उदाहरण के तौर पर हैं, किसी एक पहचाने जा सकने वाले मरीज़ का मेडिकल रिकॉर्ड नहीं हैं। हर दिल और हर वाल्व अलग होता है, और आपका इलाज तभी तय होता है जब डॉक्टर आपको देख लें और आपकी रिपोर्ट पढ़ लें।
जाँच में क्या मिला
हार्ट अटैक की तरह यहाँ मिनटों की दौड़ नहीं होती। यहाँ काम यह है कि वाल्व को ठीक से नाप लिया जाए और प्रोसीजर की पूरी प्लानिंग हो जाए — इसलिए एक-दो दिन में कुछ जाँचें की जाती हैं।
ECG — सबसे पहली बुनियादी जाँच
दिल की बिजली की गतिविधि का आसान, बिना दर्द वाला रिकॉर्ड। इसमें दिखा कि सालों तक तंग वाल्व के ख़िलाफ़ ज़ोर लगाने से दिल की मांसपेशी मोटी हो गई है, और आराम की हालत में धड़कन की कोई खतरनाक गड़बड़ी नहीं है।
ECG जाँच के बारे में2D Echo — यहाँ की सबसे ज़रूरी जाँच
छाती पर जेली लगाकर प्रोब से किया जाने वाला दिल का अल्ट्रासाउंड। इसमें दिखा कि एओर्टिक वाल्व का रास्ता बहुत ज़्यादा सिकुड़ चुका है और दिल को उसे पार करने के लिए बहुत ऊँचा दबाव बनाना पड़ रहा है। यही जाँच बताती है कि सिकुड़न गंभीर है।
2D Echo के बारे मेंTEE — वाल्व को और पास से देखना
हल्की नींद की दवा देकर एक छोटा प्रोब खाने की नली में डाला जाता है, जो दिल के ठीक पीछे होती है। वहाँ से वाल्व बहुत साफ़ दिखता है — उसका आकार, उस पर कितना कैल्शियम जमा है, और कहीं रिसाव भी है या नहीं।
TEE के बारे मेंCT स्कैन — नए वाल्व का नाप लेने के लिए
एक ख़ास CT वाल्व के रास्ते और जिन नसों से वाल्व को ले जाना है, उनका नाप मिलीमीटर तक लेता है। इसी से तय होता है कि वाल्व का कौन सा साइज़ लगेगा और कौन सा रास्ता सबसे सुरक्षित है। इस स्कैन के बिना TAVI की प्लानिंग हो ही नहीं सकती।
फ़ैसले से पहले एक जाँच और: कोरोनरी एंजियोग्राफ़ी की गई यह देखने के लिए कि दिल की नसों में भी ब्लॉकेज है या नहीं, क्योंकि तंग वाल्व और ब्लॉक नसें अक्सर साथ चलती हैं। उनके मामले में नसें ठीक निकलीं, इसलिए सिर्फ़ वाल्व ठीक करना था। आसान भाषा में गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस का मतलब है कि जिस दरवाज़े से खून दिल से बाहर निकलता है, वह सख़्त और तंग हो गया है — और दिल को हर धड़कन पर ज़ोर लगाकर खून बाहर धकेलना पड़ता है।
TAVI क्यों, ओपन-हार्ट सर्जरी क्यों नहीं
सिकुड़े एओर्टिक वाल्व को गोली-दवा से ठीक नहीं किया जा सकता। कोई भी दवा सख़्त, कैल्शियम जमे वाल्व को चौड़ा नहीं कर सकती। दवाएँ कुछ समय तक साँस की तकलीफ़ कम कर सकती हैं, पर सिकुड़न वहीं रहती है — और उन जैसी तकलीफ़ों के साथ गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस ज़्यादा दिन चुप नहीं बैठता। वाल्व बदलना ही पड़ता है।
पहले इसका एक ही रास्ता था — ओपन-हार्ट सर्जरी: छाती खोली जाती है, दिल को रोका जाता है, हार्ट-लंग मशीन शरीर का खून चलाती है, और पुराना वाल्व काटकर नया सिल दिया जाता है। सही मरीज़ में यह बहुत अच्छा और सालों से आज़माया हुआ ऑपरेशन है। लेकिन 78 साल की उमर, कमज़ोर शरीर, कम ताक़त और महीनों से कम खाना — इस हालत में वे वह “सही मरीज़” नहीं थीं। उनके केस में सर्जरी का जोखिम ज़्यादा था, और पहले वाले अस्पताल ने ऐसा कहकर कुछ ग़लत नहीं कहा था।
TAVI (जिसे TAVR भी कहते हैं) दूसरा रास्ता है। नया वाल्व एक पतली नली की नोक पर मोड़कर चढ़ाया जाता है और जाँघ की नस के रास्ते ऊपर दिल तक पहुँचाया जाता है। वहाँ उसे पुराने तंग वाल्व के अंदर ही खोल दिया जाता है — पुराना वाल्व किनारे दबकर वहीं रह जाता है, और नया वाल्व उसी वक़्त से काम करने लगता है। छाती कहीं नहीं खुलती। दिल पूरे समय धड़कता रहता है। हार्ट-लंग मशीन की ज़रूरत नहीं पड़ती। इसीलिए यह उन लोगों को भी दिया जा सकता है जिनके लिए सर्जरी बहुत भारी पड़ जाएगी।
लेकिन TAVI हर मरीज़ का जवाब नहीं है। यह वाल्व के आकार पर, उस पर कैल्शियम कैसे फैला है इस पर, पैर की नसों की मोटाई पर, मरीज़ की उमर और पूरी सेहत पर, और दिल में और क्या-क्या गड़बड़ है इस पर निर्भर करता है। यह फ़ैसला कोई एक इंसान नहीं लेता। एक हार्ट टीम — कार्डियोलॉजिस्ट, इमेजिंग करने वाले डॉक्टर और हार्ट सर्जन मिलकर — Echo, TEE और CT देखकर तय करती है कि सर्जरी, TAVI, या कभी-कभी सिर्फ़ दवाएँ, इनमें सच में बेहतर क्या है। उनके केस में टीम का जवाब TAVI था, और परिवार को साफ़-साफ़ बताया गया कि क्यों।
उनके लिए TAVI ही सही क्यों था
- वाल्व बहुत सिकुड़ा था और तकलीफ़ साफ़ थी — साँस फूलना और बेहोशी जैसा दौरा
- उमर और कमज़ोरी की वजह से ओपन-हार्ट सर्जरी का जोखिम ज़्यादा था
- CT में वाल्व और पैर की नसों का नाप TAVI के लिए ठीक निकला
- दिल की नसें ठीक थीं, इसलिए सिर्फ़ वाल्व का इलाज करना था
- इस उमर में छाती के घाव के बिना रिकवरी होना बहुत बड़ी बात थी
TAVI कब जवाब नहीं होता
- कम उमर और तंदुरुस्त मरीज़ — वहाँ लंबे समय के लिए सर्जरी अक्सर बेहतर रहती है
- CT में वाल्व का आकार या कैल्शियम का फैलाव TAVI के लायक न हो
- पैर की नसें बहुत पतली या घुमावदार हों, जिनसे वाल्व सुरक्षित न जा सके
- साथ में ऐसी दूसरी दिक्कतें जिनके लिए सर्जरी करनी ही पड़े, जैसे बायपास लायक ब्लॉकेज
- शरीर में या वाल्व पर कोई चालू इन्फेक्शन हो — पहले उसका इलाज ज़रूरी है
प्रोसीजर, कदम दर कदम
“वाल्व बदलना है” सुनकर परिवार कुछ बहुत डरावना सोच लेता है। कैथ लैब में असल में जो होता है, वह उससे बहुत शांत होता है। उनका दिन कैसा गुज़रा, पढ़िए।
तैयारी और हार्ट टीम का तैयार होना
वे एक दिन पहले भर्ती हुईं। खून की जाँचें, दाँत और इन्फेक्शन की जाँच, और उन्हें व उनके बेटों को पूरी योजना समझाई गई। उनके सवालों के जवाब देने के बाद ही सहमति (consent) ली गई। कैथ लैब में उन्हें मॉनिटर से जोड़ा गया, और कार्डियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया के डॉक्टर और पूरी टीम मौजूद रही।
जाँघ को सुन्न किया गया
जाँघ के ऊपरी हिस्से में, जहाँ बड़ी नस जाती है, एक लोकल इंजेक्शन से चमड़ी सुन्न कर दी जाती है। TAVI में आम तौर पर हल्की नींद की दवा भी दी जाती है, जिससे मरीज़ को झपकी जैसी हालत में आराम रहता है और ज़्यादातर मामलों में वेंटिलेटर की ज़रूरत नहीं पड़ती। छाती पर कहीं भी चीरा नहीं लगता।
पतली नली दिल तक जाती है
जाँघ की नस से एक पतली नली ऊपर दिल तक पहुँचाई जाती है। नसों के अंदर दर्द की नसें नहीं होतीं, इसलिए यह हिस्सा दर्द नहीं देता। पूरा रास्ता X-ray स्क्रीन पर देखा जाता है, और उनका BP और धड़कन हर पल देखी जाती रही।
नया वाल्व जगह पर बैठाया गया
मुड़ा हुआ नया वाल्व ठीक पुराने तंग वाल्व के स्तर पर लाया जाता है। मिलीमीटर तक यह जगह सही करना इस पूरे प्रोसीजर का सबसे अहम पल होता है, और कुछ भी छोड़ने से पहले इसे एक से ज़्यादा कोण से जाँचा जाता है।
वाल्व खोला गया
नया वाल्व पुराने के अंदर ही फैलाया जाता है। सख़्त पुराना वाल्व दीवार से किनारे दब जाता है और वहीं रह जाता है। नए वाल्व के पल्ले उनकी ही धड़कन के साथ उसी वक़्त खुलने-बंद होने लगते हैं।
जाँच, और नली बाहर
वाल्व के आर-पार का दबाव दोबारा नापा गया और टेबल पर ही Echo करके देखा गया कि वाल्व ठीक बैठा है और कहीं रिस नहीं रहा। नली निकालकर जाँघ की जगह बंद कर दी गई। छाती पर कोई टाँका नहीं, जाँघ पर बस एक छोटी पट्टी।
बाद में उन्होंने क्या बताया: उन्होंने कहा कि जिस चीज़ से वे सबसे ज़्यादा डर रही थीं — “ऑपरेशन होना” — वह तो हुआ ही नहीं। उन्हें याद रहा कि एक पतली टेबल पर लेटी थीं, लोग शांति से बात कर रहे थे, और जाँघ के ऊपर दबाव जैसा महसूस हुआ। शाम तक वे बिस्तर पर तकिये के सहारे बैठी थीं और परिवार पास था। महीनों से जो साँस फूलती थी, वह पानी पीने के लिए उठकर बैठने पर ही साफ़ कम लगी।
रिकवरी, दिन दर दिन
परिवार सबसे पहले यही पूछता है, और यही बात ज़्यादातर पेज ईमानदारी से नहीं बताते। ओपन सर्जरी के मुक़ाबले TAVI के बाद रिकवरी तेज़ होती है, मुख्य वजह यही है कि भरने के लिए कोई बड़ा घाव नहीं होता। पर तेज़ होने का मतलब बिना निगरानी नहीं है।
उसी दिन — बैठना और खाना
धड़कन और BP की नज़दीकी निगरानी के लिए उन्हें CCU में रखा गया। उसी शाम बैठने और हल्का खाना लेने की इजाज़त मिल गई। जाँघ की जगह बार-बार देखी गई कि कहीं खून या सूजन नहीं है।
दिन 1 से 2 — वार्ड में चलना
सहारे से बिस्तर से उतरना, फिर गलियारे में चलना। धड़कन पर ख़ास नज़र रखी गई, क्योंकि नया वाल्व दिल की अपनी बिजली की तारों के बहुत पास बैठता है और शुरुआती दिनों में धड़कन बदल सकती है।
दिन 3 से 4 — घर जाना
वाल्व ठीक काम कर रहा है, यह पक्का करने के लिए दोबारा Echo, जाँघ की जगह की आख़िरी जाँच, और उन्हें व उनकी बहू को एक-एक गोली लिखकर समझाई गई। ज़्यादातर मरीज़ कुछ दिनों में घर चले जाते हैं।
पहला हफ़्ता — घर में चलना-फिरना
शुरू के दिनों से घर के अंदर छोटी-छोटी चहलकदमी, फिर बरामदे और गेट तक। कोई वज़न नहीं उठाना, ज़ोर नहीं लगाना, जिस पैर से नली गई उस पर भारी काम नहीं। लगभग एक हफ़्ते में वे घर में आराम से चलने लगी थीं।
चौथे से छठे हफ़्ते — अपनी पुरानी दिनचर्या
फ़ॉलो-अप में ECG और Echo, यह देखने के लिए कि वाल्व और दिल की मांसपेशी कैसे सेट हो रही है। इस समय तक वे बाहर आना-जाना कर रही थीं, सीढ़ी धीरे-धीरे पर बिना रुके चढ़ रही थीं, और खाना भी ठीक से खा रही थीं।
जोखिम के बारे में ईमानदार बात। TAVI में छाती नहीं खुलती, पर यह फिर भी दिल का प्रोसीजर है और इसमें असली जोखिम रहते हैं। सबसे ज़्यादा जिस चीज़ पर हम नज़र रखते हैं वह है धड़कन की गड़बड़ी: नया वाल्व दिल की अपनी बिजली की तार के ठीक बगल में बैठता है, और कुछ मरीज़ों में बाद में धड़कन इतनी धीमी हो जाती है कि पेसमेकर लगाना पड़ता है। जहाँ से नली गई, उस जाँघ पर खून निकलना या सूजन हो सकती है। और जैसे दिल व बड़ी नसों के किसी भी प्रोसीजर में होता है, लकवा (stroke) का जोखिम भी रहता है। किडनी की हालत और नए वाल्व की सील भी जाँची जाती है। ये सब बातें परिवार को सहमति लेने से पहले बताई जाती हैं, बाद में नहीं — और यहाँ हम आपको इनका कोई आँकड़ा नहीं दे रहे, क्योंकि असली जोखिम आपके अपने दिल, आपकी रिपोर्ट और आपकी सेहत पर निर्भर करता है।
फ़ॉलो-अप प्रोसीजर जितना ही ज़रूरी है। वाल्व एक चलता-फिरता पुरज़ा है, और उसे तय समय पर Echo करके ज़िंदगी भर जाँचा जाता है। TAVI के बाद दवाएँ आम तौर पर सर्जरी वाले वाल्व से आसान रहती हैं, पर वे हर केस में अलग तय होती हैं — किसी दूसरे मरीज़ की दवा देखकर नहीं, और अपने मन से बंद भी नहीं करनी। बुख़ार, नई साँस की तकलीफ़, पैरों में सूजन, बेहोशी या नाड़ी बहुत धीमी लगे, तो अगली अपॉइंटमेंट का इंतज़ार नहीं — उसी दिन अपने कार्डियोलॉजिस्ट को फ़ोन कीजिए।
आपके लिए इसका क्या मतलब है
अगर आपसे किसी ने कहा है कि आपकी माँ या पिताजी की “अब उमर हो गई, दिल का ऑपरेशन नहीं हो सकता” — तो यह हिस्सा ध्यान से पढ़िए। यह बात ओपन सर्जरी के बारे में कई बार सही होती है। पर इसका मतलब यह नहीं है कि कुछ भी नहीं किया जा सकता।
सिकुड़ा वाल्व एक मशीनी (mechanical) दिक्कत है, कोई रहस्य नहीं। दिल के अंदर का एक दरवाज़ा सख़्त हो गया है। मशीनी दिक्कत का हल अक्सर मशीनी तरीके से निकल आता है, और आज कई बार यह बिना छाती खोले भी हो जाता है। सवाल यह नहीं है कि “क्या वे सर्जरी झेल पाएँगी?” — सवाल यह है कि “क्या किसी हार्ट टीम ने उनका Echo देखकर बताया है कि उनके पास कौन-कौन से रास्ते हैं?”
दूसरी बात जो हम चाहते हैं आप याद रखें, वह बुज़ुर्गों में साँस फूलने के बारे में है:
- थोड़ा चलने पर साँस फूलना उमर का असर नहीं है — यह एक लक्षण है, और इसकी कोई वजह होती है
- बुज़ुर्ग को चलने-चढ़ने पर बेहोशी या चक्कर आए तो दिल की जाँच ज़रूरी है, आराम और टॉनिक नहीं
- Echo सबसे आसान पहला कदम है — दर्द नहीं, सुई नहीं, रेडिएशन नहीं, और वाल्व साफ़ दिख जाता है
- अगर बताया गया है कि वाल्व बहुत सिकुड़ा है, तो TAVI के बारे में और हार्ट टीम की राय के बारे में ख़ास तौर पर पूछिए
- पुरानी Echo रिपोर्ट और फ़िल्म साथ लाइए — पुराने Echo से मिलान करने पर हमें बहुत कुछ पता चलता है
- साँस फूलना हर समय रहने लगे, तब तक इंतज़ार मत कीजिए — लक्षण आना ही बताता है कि वाल्व पहले से गंभीर है
अगर यह अभी हो रहा है तो इंतज़ार न करें। वाल्व की जानी-पहचानी दिक्कत वाले बुज़ुर्ग को आराम करते हुए भी साँस फूले, छाती में दर्द हो, या बेहोशी आए — तो उन्हें अगले हफ़्ते नहीं, आज दिखाना चाहिए। हमारी कार्डियक इमरजेंसी 24x7 खुली है — +91 77778 65621।
यह प्रथमेश में क्यों हो सका
TAVI सिर्फ़ एक डॉक्टर के हुनर का काम नहीं है। इसमें सही इमेजिंग, ईमानदार फ़ैसला और ऐसी टीम चाहिए जो कैथेटर के अंदर से दिल को संभाल सके।
DM कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ
जो कंसल्टेंट आपकी रिपोर्ट देखकर इलाज तय करते हैं, वही प्रोसीजर करते हैं और फ़ॉलो-अप में भी आपको देखते हैं।
वाल्व की पूरी जाँच यहीं
ECG, 2D Echo और TEE यहीं होते हैं, जिससे कुछ भी तय करने से पहले वाल्व ठीक से नापा और देखा जाता है।
कैथ लैब और CCU एक ही बिल्डिंग में
वाल्व प्रोसीजर के बाद निगरानी उसी अस्पताल में ऊपर चलती रहती है — बुज़ुर्ग मरीज़ को एक से दूसरे अस्पताल ले जाने की ज़रूरत नहीं।
हार्ट टीम का फ़ैसला, साफ़ शब्दों में
अगर आपके लिए सर्जरी या सिर्फ़ दवाएँ बेहतर हैं, तो हम यही कहेंगे। हर सिकुड़े वाल्व का इलाज TAVI नहीं होता।
परिवार को पहले ही पूरी बात
प्रोसीजर, रिकवरी और जोखिम — पेसमेकर की ज़रूरत पड़ने की संभावना भी — सहमति लेने से पहले आसान भाषा में समझाए जाते हैं।
दुर्ग-भिलाई से आना आसान
NH-30, अमलीडीह रोड, देवपुरी — दुर्ग, भिलाई और रायपुर के आस-पास के ज़िलों से सीधा रास्ता।
आपका इलाज कौन करेगा
आपका केस सीधे हमारे किसी सीनियर हृदय रोग विशेषज्ञ के हाथ में रहता है, जो हर कदम पहले समझाते हैं।
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डॉ. गौरव त्रिपाठी
TAVI और बैलून वाल्वोटॉमी जैसे कैथेटर से किए जाने वाले वाल्व प्रोसीजर करते हैं, और Echo, TEE व CT के नाप से हर केस की योजना बनाते हैं।
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डॉ. सुलभ चंद्राकर
वाल्व की बीमारी और हार्ट फेलियर की जाँच, वाल्व प्रोसीजर के बाद धड़कन की गड़बड़ी, और लंबे समय के वाल्व फ़ॉलो-अप को संभालते हैं।
इस बारे में मरीज़ हमसे क्या पूछते हैं
एओर्टिक वाल्व वह दरवाज़ा है जिससे खून दिल से निकलकर पूरे शरीर में जाता है। एओर्टिक स्टेनोसिस में यह दरवाज़ा सख़्त और तंग हो जाता है, आम तौर पर सालों में जमे कैल्शियम की वजह से। इसके बाद दिल को हर धड़कन पर बहुत ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है, इसीलिए मरीज़ को साँस फूलती है, थकान रहती है और चलने-चढ़ने पर कभी चक्कर या बेहोशी आती है।
नहीं। नया वाल्व एक पतली नली पर जाँघ की नस के रास्ते ऊपर पहुँचाया जाता है और पुराने वाल्व के अंदर ही खोल दिया जाता है। छाती पर कोई चीरा नहीं लगता, हार्ट-लंग मशीन की ज़रूरत नहीं पड़ती, और दिल पूरे समय धड़कता रहता है। भरने के लिए सिर्फ़ जाँघ के ऊपर की छोटी जगह होती है।
सिर्फ़ उमर से यह तय नहीं होता। जिन मरीज़ों को ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए बहुत जोखिम वाला माना जाता है, TAVI असल में उन्हीं के लिए बनाया गया था। तय करने वाली बातें हैं — CT और Echo में वाल्व का बनावट, पैर की नसों की हालत और मरीज़ की पूरी सेहत, जिन्हें हार्ट टीम मिलकर देखती है।
कोई भी दवा सख़्त, कैल्शियम जमे वाल्व को चौड़ा नहीं कर सकती। गोलियाँ साँस की तकलीफ़ कम कर सकती हैं और BP व शरीर का पानी संभाल सकती हैं, जिससे कुछ समय आराम रहता है, पर सिकुड़न वहीं बनी रहती है। लक्षणों के साथ गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस में वाल्व बदलना ही वह इलाज है जो नतीजा बदलता है।
दिल के किसी भी प्रोसीजर की तरह इसमें भी असली जोखिम हैं। मुख्य हैं — धड़कन की गड़बड़ी, जिसके लिए कभी-कभी बाद में पेसमेकर लगाना पड़ता है; जहाँ नली डाली जाती है वहाँ जाँघ पर खून निकलना या सूजन; और लकवा (stroke) का जोखिम। नए वाल्व के किनारे से थोड़ा रिसाव या किडनी पर असर भी हो सकता है। आपका अपना जोखिम आपकी रिपोर्ट देखकर आँका जाता है और सहमति लेने से पहले आपको बताया जाता है।
जाँघ को लोकल इंजेक्शन से सुन्न किया जाता है और आम तौर पर हल्की नींद की दवा भी दी जाती है, इसलिए ज़्यादातर मरीज़ दर्द की जगह झपकी जैसी आराम वाली हालत में रहते हैं। नसों के अंदर दर्द की नसें नहीं होतीं, इसलिए दिल तक जाती नली महसूस नहीं होती। मरीज़ आम तौर पर जाँघ के ऊपर दबाव जैसा लगना बताते हैं, उससे ज़्यादा कुछ नहीं।
आम तौर पर कुछ दिन रुकना पड़ता है, जिसमें पहला दिन नज़दीकी निगरानी में बीतता है। ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन या अगले दिन बैठकर खाना खा लेते हैं, एक-दो दिन में वार्ड में चलने लगते हैं, और लगभग एक हफ़्ते में घर में आराम से चलने-फिरने लगते हैं। भरने के लिए कोई बड़ा घाव नहीं होता, यही रिकवरी तेज़ होने की मुख्य वजह है।
एओर्टिक वाल्व दिल की अपनी बिजली की तारों के बहुत पास होता है। नया वाल्व फैलाने पर कुछ मरीज़ों में वह तार दब जाती है और धड़कन बहुत धीमी हो जाती है। अगर धीमी धड़कन अपने आप ठीक न हो, तो दिल की रफ़्तार बनाए रखने के लिए पक्का पेसमेकर लगाया जाता है। इसीलिए शुरुआती दिनों में धड़कन पर ख़ास नज़र रखी जाती है।
TAVI के वाल्व टिश्यू के बने होते हैं और सर्जरी वाले टिश्यू वाल्व की तरह ये हमेशा के लिए नहीं होते। तय समय पर Echo करके देखा जाता है कि वाल्व सालों में कैसा काम कर रहा है। कोई एक वाल्व कितना चलेगा यह मरीज़ पर निर्भर करता है, इसलिए आपके कार्डियोलॉजिस्ट आपके केस में क्या उम्मीद करना ठीक है, यह बताएँगे — कोई एक पक्का आँकड़ा नहीं।
कई बार हाँ, पर पहले कोरोनरी एंजियोग्राफ़ी से ब्लॉकेज देखे जाते हैं। ब्लॉकेज कितना है और कहाँ है, इसके हिसाब से किसी ज़रूरी ब्लॉकेज में वाल्व से पहले या साथ में स्टेंट डाला जा सकता है, या हार्ट टीम दोनों दिक्कतों के लिए सर्जरी की सलाह दे सकती है। ऐसे ही फ़ैसलों के लिए हार्ट टीम होती है।